एलर्जी

बाल खाद्य एलर्जी और खाद्य असहिष्णुता

एक एलर्जी क्या है?

एलर्जी पर्यावरण में मौजूद पदार्थों जैसे धूल व परागकण और कुछ खास खाद्य पदार्थों के प्रति एक अतिसंवेदनशीलता की स्थिति है. एलर्जी से ग्रस्त व्यक्तियों को उन परिस्थितियों में भी प्रतिकूल प्रभावों का सामना करना पड़ता है, जहाँ सामान्य व्यक्तियों को कोई समस्या नहीं होती. एलर्जी से पैदा होने वाली प्रतिक्रियायें या तो स्थानीय या प्रणालीगत सूजन पैदा करने वाली हो सकती हैं.

एलर्जी की प्रतिक्रिया के स्थानीय लक्षणों में नाक की श्लेष्मिक झिल्ली में सूजन, आंखों में लाली और खुजली, छींकें, घरघराहट और (दमा के हमलों सहित) साँस लेने में कठिनाई; परिपूर्णता, कान में दर्द, सुनने में परेशानी, (युस्टेशियन ट्यूब की रुकावट के कारण) एक्जिमा, पित्ती, या त्वचाशोथ और साइनस के दबाव से सिर दर्द होना आदि शामिल हो सकते हैं.

प्रणालीगत प्रतिक्रियायें, या तीव्रग्राहिता, कई शरीर प्रणालियों, विशेष रूप से श्वसन, संचार और पाचन प्रणाली को प्रभावित कर सकती हैं. इसकी गंभीरता अलग-अलग हो सकती है, और चरम प्रतिक्रियाओं में एपिनेफ्रीन के एक इंजेक्शन की आवश्यकता हो सकती है. तीव्रग्राहिता एक बार कम होकर फिर समय की एक लम्बी अवधि में दोबारा प्रकट हो सकती है.

सभी प्रकार की एलर्जी की घटनाओं में हाल में काफी वृद्धि हुई है. इसका स्पष्टीकरण इन सब बातों के द्वारा दिया जा सकता है – बेहतर निदान, आधुनिक जीवन (एकाधिक रासायनिक संवेदनशीलता) के सभी पहलुओं में रसायनों का वितरण और व्यापक उपयोग, एलर्जी, असहिष्णुता, और वास्तविक विषाक्त पदार्थों के बीच अपूर्ण भेद, और उपचार और रोगों की रोकथाम में एंटीबायोटिक दवाओं व टीकाकरण का लगातार बढ़ता इस्तेमाल मानव प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए अनपेक्षित परिणाम दे रहा हो सकता है.

खाद्य एलर्जी

खाद्य एलर्जी हमारे खाए गए आहार के प्रति प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया है. भोजन के किसी घटक को शरीर गलती से हानिकारक समझ लेता है और एंटीबॉडी के रूप में इसके खिलाफ एक रक्षा कवच बना देता है. एंटीबॉडी और उस खाद्य की इस लड़ाई के कारण एलर्जी के लक्षण विकसित होते हैं. आम खाद्य एलर्जियों में मूंगफली, मेवे, मछली, शंख, दूध, अंडे, सोया और गेहूं शामिल हैं, जो लगभग 8%बच्चों और 4%वयस्कों को प्रभावित करती हैं.

खाद्य एलर्जी आम तौर पर कुछ प्रोटीनों के लिए संवेदनशीलता से विकसित होती है. जब पहली बार एक अपराधी प्रोटीन युक्त भोजन किया जाता है, तब प्रतिरक्षा प्रणाली एक विशिष्ट एंटीबॉडी (इम्यूनोग्लोब्युलिन ई, या आईजीई) बनाकर उसके खिलाफ प्रतिक्रिया करती है. संवेदीकरण के बाद, जब भी इस प्रोटीन से युक्त भोजन खाया जाता है, आईजीई एंटीबॉडी और हिस्टामाइन सहित अन्य रसायन, हमलावर को निष्कासित करने की कोशिश करते हैं. हिस्टामाइन एक शक्तिशाली रसायन है, जो कि केवल जठरांत्र संबंधी मार्ग को ही नहीं, बल्कि शरीर के अन्य सिस्टमों को भी प्रभावित कर सकता है. एलर्जी की प्रतिक्रिया को गति प्रदान करने के लिए आवश्यक भोजन की मात्रा प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकती है.

आवश्यक भोजन की राशि एक व्यक्ति में एक खाद्य एलर्जी के विशिष्ट लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि हिस्टामाइन शरीर में कहाँ पर छोड़ा जा रहा है. खाना खाने और उसके पाचन-तंत्र से गुजरते हुए ये प्रतिक्रियायें कभी-कभी एक संयोजन या लक्षणों के अनुक्रम के रूप में भी हो सकती हैं.

एक खाद्य एलर्जी के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं और इनमें ये लक्षण शामिल हो सकते हैं:

  • जी मिचलाना
  • पेट दर्द
  • दस्त
  • दाने, पित्ती या त्वचा में खुजली
  • साँस उखड़ना
  • छाती में दर्द
  • वायुमार्ग की सूजन
  • तीव्रग्राहिता

बच्चे और वयस्क दोनों ही खाद्य एलर्जी के लिए अतिसंवेदनशील हो सकते हैं. खाद्य एलर्जी परिवारों में अक्सर पीढ़ियों तक चलती है और इस बात के पुख्ता सबूत मौजूद होने के बावजूद कि आनुवंशिक प्रवृत्ति मौजूद है, वे सरल (क्लासिक मेंडेलियाई) वंशानुक्रम पैटर्न में नहीं आते. एलर्जी और दमा दोनों जटिल आनुवंशिक विकार हैं, जिनमें अनेक ऐसे जीनों की पारस्परिक क्रिया होती है, जहाँ प्रत्येक की अपनी बदलती रहने वाली प्रवृत्ति होती है और कुछ जीन रोग के विकास के लिए योगदान देने वाले  और कुछ वास्तविक सुरक्षात्मक मूल्यों वाले होते हैं. अनुसंधान द्वारा संभावित जोखिमपूर्ण कारकों और पर्यावरण और जीवन शैली से संबंधित सुरक्षात्मक कारकों का भी सुझाव दिया गया है.

खाद्य असहिष्णुता

खाद्य असहिष्णुता प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया के बजाय पाचन प्रणाली की प्रतिक्रिया है. किसी खास खाद्य-पदार्थ में कुछ ऐसा हो सकता है, कि वह पाचन तंत्र के काम में अड़चन डाले या भोजन को ठीक से पचा पाने या उसके टुकड़े करने में उसे असमर्थ कर दे. एलर्जी की ही तरह, असहिष्णुता के लक्षणों को उत्तेजित करने के लिए आवश्यक भोजन की राशि भी प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकती है.

खाद्य असहिष्णुता के लक्षण भी हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं और इनमें ये लक्षण शामिल हो सकते हैं:

  • जी मिचलाना
  • पेट दर्द
  • दस्त
  • गैस, ऐंठन, या सूजन
  • उल्टी
  • सीने में जलन और रिफ्लक्स
  • सिरदर्द
  • चिड़चिड़ापन या घबराहट

खाद्य असहिष्णुता कुछ खास प्रोटीनों को ठीक से पचाने के लिए आवश्यक एंजाइमों की कमी से हो सकती है जैसे लैक्टोज असहिष्णुता. कुछ व्यक्तियों में असहिष्णुता ऐसे रासायनिक तत्वों की वजह से हो सकती है, जिन्हें रंग व स्वाद बढ़ाने या बैक्टीरिया के खिलाफ भोजन की रक्षा के लिए भोजन में मिलाया जाता है. कुछ व्यक्तियों के लिए स्वाभाविक रूप से भोजन में पाए जाने वाले और मोल्ड को रोकने के लिए मिलाये जाने वाले – दोनों प्रकार के सल्फाइट्स असहिष्णुता का स्रोत हो सकते हैं. सैलिसिलेट, जो कि फल, सब्जियों, मेवों, और रसों में प्राकृतिक रूप से पाये जाने वाले रसायनों का एक समूह है, भी एस्पिरिन के प्रति संवेदनशील व्यक्तियों में असहिष्णुता का एक स्रोत हो सकता है, जो उनके लक्षणों को बढ़ा सकता है.

यह ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है कि किसी भी भोजन का अत्यधिक मात्रा में सेवन असहिष्णुता से मिलते-जुलते पाचन लक्षण पैदा कर सकता है.

एलर्जी, असहिष्णुता, और खाद्य इनकार

अगर बच्चे को अनिदानित एलर्जी वाला खाद्य-पदार्थ लम्बे समय तक खिलाया जाता रहे, तो पोषण से सम्बंधित लक्षणों या समस्याओं के पैदा हुए बिना भी ये पदार्थ पाचन तंत्र में घाव या बेचैनी पैदा कर सकते हैं, जिससे खाना एक दर्दनाक क्रिया बनकर खाने से इनकार की मात्रा को बहुत अधिक बढ़ा देता है. अज्ञात खाद्य असहिष्णुता भी पाचन और पोषण की तीव्र या पुरानी समस्याओं को पैदा कर सकती है, जो साधारण व गंभीर दोनों ही प्रकार की हो सकती हैं या  इनकार की आदतों के मुखौटे के पीछे छुपी हो सकती हैं.

निदान और परीक्षण

कुछ बाल खाद्य एलर्जी कई महीनों के लिए अनिदानित रह सकती हैं और माता-पिता के लिए चिंता का कारण और शिशुओं और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम हो सकती हैं. मल में रक्त या आंव, रिफ्लक्स, त्वचा पर चकत्ते, और अन्य परेशान करने वाले लक्षणों का वायरस या पेट के दर्द के रूप में निदान किया जा सकता है, लेकिन असल में ये दूध या सोया से एलर्जी हो सकती है. आहार-विकारों के उपचार को प्रभावित करने वाली अंतर्निहित चिकित्सा की स्थिति की पहचान करने के लिए, संभावित परेशानी या एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थों और साथ ही संयोगवश पैदा हुई या बाद की प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं के एक विस्तृत विश्लेषण की आवश्यकता है, भले ही वे शुरू में संदिग्ध नहीं हों.

एलर्जी के लिए परीक्षण आमतौर पर आयु से सम्बंधित संवेदनशीलता के पैटर्न से प्रभावित होती है. खाद्य पदार्थों के लिए संवेदन शीलता केवल कुछ सप्ताह के बच्चों में भी हो सकती है, जबकि दो या तीन साल की आयु से पहले सांस की एलर्जी के लिए संवेदीकरण विकसित होना एक असामान्य बात है. स्कूल जाने की उम्र से छोटे बच्चों में, (जैसे पालतू जानवर, धूल, या बारीक घुन) इनडोर एलर्जी के लिए संवेदीकरण आउटडोर एलर्जी (जैसे पराग) के लिए संवेदीकरण की तुलना में अधिक आम है.

अगर बाल रोग विशेषज्ञ या एलर्जी विशेषज्ञ को खाद्य एलर्जी का संदेह हो तो वे उस चीज़ को खाने के बाद के लक्षणों और उसके इतहास की जांच करेंगे और अगर प्रतिक्रियायें खाद्य एलर्जी की ओर संकेत करती हैं, तो वे उसके लिए ज़रूरी परीक्षण करवाएंगे, जो कई प्रकार के (नीचे सूचीबद्ध) हो सकते हैं.

त्वचा परीक्षण बिलकुल सरल और सीधे होते हैं और कुछ ही मिनटों में परिणाम उपलब्ध कराते हैं :

चुभन परीक्षण – संदिग्ध एलर्जी वाले पदार्थ की एक छोटी राशि या एलर्जी की एक बैटरी को विशेष रूप से लेबल लगाये गए स्थानों में त्वचा के नीचे डाला जाता है. अगर उस खास पदार्थ से एलर्जी होगी, तो वहां एक पित्ती या लाली और सूजन बन जाएगी और इसलिए इम्यूनोग्लोब्युलिन जी (आईजीजी) के लिए तुरंत सकारात्मक या नकारात्मक परिणाम प्राप्त किया जा सकता है.

पैच परीक्षण – संदिग्ध पदार्थ को त्वचा पर लगाया जाता है और एक पैच से उस जगह पर चिपका दिया जाता है. एक जीवाणुरहित पैच एक अन्य स्थान पर लगाया जाता है. यदि संदिग्ध पैच के तहत पित्ती बन जाती है, लेकिन नियंत्रण पैच के नीचे नहीं बनती है, तो परीक्षण सकारात्मक है.

एक त्वचा परीक्षण यह भविष्यवाणी नहीं कर सकता कि एक एलर्जी से युक्त खाद्य लेने पर क्या प्रतिक्रिया हो सकती है, लेकिन यह रोगी के विशेष खाद्य पदार्थों के लिए प्रतिक्रियाओं के  इतिहास द्वारा एलर्जी होने की पुष्टि कर सकता है.

रक्त परीक्षण, सबसे अधिक रेडियोएलर्जोसोर्बेंट टेस्ट (RAST), खून में आईजीजी एंटीबाडीज की वास्तविक राशि को माप सकता है, जिसकी कुछ खाद्य पदार्थों की भावी राशि से तुलना की जाती है. रक्त परीक्षण एक ही नमूने  से एलर्जी के सैकड़ों कारणों की जांच की जा सकती है और ये इन्हेलेंट्स के साथ खाद्य एलर्जी कारकों को भी कवर करते हैं. हालांकि, गैर आईजीजी मध्यस्थता एलर्जी का इस पद्धति से पता नहीं लगाया जा सकता. आईजीजी के लिए रक्त परीक्षण के महत्व के बारे में  कुछ विवाद है, जो देरी से शुरु होने वाली खाद्य एलर्जी (वायरस, बैक्टीरिया और कवक के साथ जुड़े) के विपरीत आमतौर पर तेजी से शुरू होने वाली आईजीजी एलर्जी की ओर इशारा कर सकता है.

त्वचा परीक्षण रक्त परीक्षण की तुलना में अधिक तेज और संवेदनशील हो सकता है, तकनीक पर निर्भर करते हुए, लेकिन रक्त परीक्षण के कुछ खास दवाओं या पहले से मौजूद दानों  से प्रभावित होने की संभावना त्वचा परीक्षण से कम होती है. जिन केसों में मरीज़ संदिग्ध एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थ के गंभीर दुष्प्रभावों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं, वहां रक्त परीक्षण को प्राथमिकता दी जाती है.

खाद्य चुनौती परीक्षण, आदर्श रूप से डबल ब्लाइंड प्लेसीबो नियंत्रित परीक्षण, बारीकी से नजर रखते हुए कड़ी निगरानी में किये जाते हैं, ताकि अन्य कारकों जैसे इस तरह के भोजन तैयार करने की तकनीक या भोजन की पहचान के लिए मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रियाओं को समाप्त किया जा सके.

एक उन्मूलन आहार एक बच्चे के आहार से विशिष्ट संदिग्ध खाद्य पदार्थ या सामग्री को स्वेच्छा से हटा देने की प्रक्रिया है. यदि कुछ समय के बाद ये लक्षण समाप्त हो जाते हैं, तो बाल रोग विशेषज्ञ या एलर्जी विशेषज्ञ उन खाद्य पदार्थों को एक-एक करके खाने में फिर से शामिल कर सकते हैं. यदि लक्षण वापस आ जाते हैं, तो एक विशिष्ट निदान से आमतौर पर इस बात की पुष्टि की जा सकती है. दोषी तत्वों की मात्रा को सीमित करने के लिए इसे दोहराया भी जा सकता है. एक आहार विशेषज्ञ एलर्जी वाले भोजनों के पोषक तत्वों की अनुपस्थिति की क्षतिपूर्ति करने के लिए संभावित योजना बनाकर मेनू बनाने में सहायता कर सकते हैं.

यदि एनाफाईलैक्टिक या अन्य गंभीर प्रतिक्रियायें भी हो रही हों, तो उन्मूलन आहार और खाद्य चुनौती परीक्षण नहीं किया जा सकता.

कुपोषण व कुअवशोषण की सीमा और गंभीरता और प्रणालीगत भागीदारी निर्धारित करने के लिए ये सब अन्य परीक्षण भी किये जा सकते हैं:

  • पूर्ण रक्त गणना (सीबीसी) एनीमिया का पता लगाने के लिए
  • एरिथ्रोसाइट अवसादन दर (ईएसआर) और सी-रिएक्टिव प्रोटीन (सीआरपी) सूजन के मूल्यांकन के लिए
  • व्यापक चयापचय पैनल (सीएमपी) इलेक्ट्रोलाइट, प्रोटीन और कैल्शियम का स्तर निर्धारित करने के लिए
  • विटामिन डी, ई, और बी 12 के स्तर संभावित विटामिन की कमी को मापने के लिए
  • मल वसा कुअवशोषण मूल्यांकन के लिए

जठरांत्र भोजन अतिसंवेदनशीलता और अधिक गंभीर विशिष्ट बीमारी की स्थिति के निदान के लिए अन्य उपकरणों में ऊपरी या निचली एंडोस्कोपी (कोलोनोस्कोपी) से बायोप्सी शामिल हैं.

विभेदक निदान हमेशा अधिक दखल देने वाले उपायों से पहले एक महत्वपूर्ण कदम है. लैक्टोज असहिष्णुता और सीलिएक रोग दोनों ही बहुत विशिष्ट प्रोटीनों से प्रतिक्रिया के लिए जाने जाते हैं. परेशान करने वाला आंत्र सिंड्रोम एक खाद्य एलर्जी के कारण हो सकता है, लेकिन असहिष्णुता के लिए एक महत्वपूर्ण निदान है, जब किन्हीं एलर्जी कारकों की पहचान न की जा सकी हो.

उपचार और संकल्प

खाद्य एलर्जी या असहिष्णुता के लिए प्राथमिक उपचार है, एलर्जी पैदा करने वाले खाद्य पदार्थ, या खाद्य पदार्थों में मौजूद किसी तत्व को खाने से बचना, जो एलर्जी पैदा करते हों या पाचन प्रतिक्रियाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हों.

दूध, अंडे, सोया, या गेहूं के लिए संवेदनशीलता या एलर्जी वाले बच्चों में से लगभग 50% छह साल या उससे अधिक उम्र तक इसे पीछे छोड़ देते हैं. जो 12 साल की उम्र तक भी ठीक नहीं होते, उनमें से 8% से भी कम अंततः इससे निजात पाने में सफल हो पाते हैं. मूंगफली और मेवों से एलर्जी के ठीक होने की संभावना न के बराबर होती है. वे बच्चे भी जो खाद्य एलर्जी से एक बार पार पा चुके हों, अगर वे नियमित रूप से उस एलर्जी वाले पदार्थ का उपभोग नहीं करते, तो अंततः वापस उस एलर्जी से ग्रस्त हो सकते हैं.

जोखिम

गंभीर जोखिमों से बचने के लिए हमेशा नई जानकारियों से खुद को अपडेट रखना, प्रभावित बच्चों को शिक्षित करना – जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं और अपने भोजन की संवेदनशीलता से निपटना सीखते हैं – आहार और पर्यावरण में मौजूद उद्दीपकों से सावधान रहना और एक ज्ञात खाद्य संवेदनशीलता के साथ जुड़े जोखिम के बारे में बाल-चिकित्सक से नियमित परामर्श करते रहना आवश्यक होता है. सामान्य रूप से मामूली सावधानियां बरतना पर्याप्त होगा.

हवा में मौजूद खाद्य कण भी एलर्जी की प्रतिक्रिया को गति प्रदान कर सकते हैं. कुछ हद तक सेकेंड हैंड धुएं की तरह, वे लोग, जो प्रत्यक्ष रूप से उसे ग्रहण नहीं कर रहे हैं, उनके लिए भी इनके हानिकारक प्रभाव हो सकते हैं. सेकेंड हैंड धुएं के विपरीत, जो हर किसी को नुकसान पहुंचा सकता है, हवाई खाद्य कण केवल कुछ लोगों के लिए ही खतरनाक होते हैं. अनुमानित रूप से प्राथमिक स्कूल की उम्र के 3% बच्चों और 2% वयस्कों को खाद्य एलर्जी होती है, और मौलिक संवेदनशील लोगों की संख्या इस अपेक्षाकृत छोटी आबादी का भी एक अंश मात्र होता है.

खाद्य एलर्जी वाले लोगों के लिए मौजूद जोखिम को मद्देनज़र रखते हुए कई देशों ने ऐसे कानून बनाये हैं, जिनके अनुसार अगर किसी खाद्य पदार्थ में प्रमुख एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थों या इन पदार्थों के किन्हीं भी घटकों का प्रयोग किया गया है, तो उसके लेबल पर इसकी पूरी जानकारी देना आवश्यक है. संयुक्त राज्य अमेरिका के  खाद्य एलर्जी लेबल और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2004 के अनुसार स्पष्ट, सादी भाषा में यह जानकारी देना अनिवार्य है.

करीब से देखने पर

सीलिएक रोग

 सीलिएक रोग (सीडी), जिसे लस संवेदनशील एंटेरोपैथी (जीएसइ) भी कहा जाता है, छोटी आंत के एक स्वप्रतिरक्षित विकार और लस असहिष्णुता या संवेदनशीलता का एक विशिष्ट रूप है. इसके लक्षणों में बहुत ज्यादा दस्त, कुपोषण, और थकान को शामिल कर सकते हैं, लेकिन इनकी बजाय अन्य अंगों में कुछ और परेशानियाँ भी हो सकती हैं, जैसे डर्मेटायसिस हर्पेटीफोर्मिस, जो एक अत्यंत खुजली वाली पित्ती की अवस्था है.

यह बीमारी गेहूं, जौ और राई में पाए जाने वाले कुछ खास लस प्रोटीनों (प्रोलैमिंस) के लिए एक प्रतिक्रिया के कारण होती है. यह आनुवंशिक रूप से संवेदनशील व्यक्तियों में होती है, जिनके एंजाइम ऊतक, ट्रांसग्लूटामिनेस, प्रोटीन को संशोधित कर देते है और प्रतिरक्षा प्रणाली में सूजन पैदा हो जाती है. यह छोटी आंत की परत में विली को नुकसान पहुंचाती है और न सिर्फ लस युक्त भोजन के, बल्कि सभी पोषक तत्वों के अवशोषण में हस्तक्षेप करती है.

.शोध बताते हैं कि लस सीलिएक रोग के विकास में बचपन में लस के संपर्क में आने का समय एक कारक हो सकता है, लेकिन विभिन्न आयुओं में गेहूं, जौ या राई के संपर्क में आने वाले शिशुओं में परिणाम अनिर्णायक रहे हैं. लस युक्त अनाज की शुरूआत तक स्तनपान कराते रहने से शिशुओं में सीलिएक रोग विकसित होने का खतरा कम हो जाता है.

सीलिएक रोग का निदान एंटी-एंडोमाइशियम (ईएमए) और विरोधी ऊतक ट्रांसग्लूटामिनेस के स्तर को मापने के लिए रक्त एंटीबॉडी परीक्षण के साथ शुरू होता है. हालांकि, सकारात्मक परिणाम निदान की ओर इशारा भर करते हैं, और अगर परिणाम नकारात्मक रहे हैं तो सीलिएक रोग की संभावना से इनकार किया जा सकता है. विली की क्षति की जाँच करने के लिए छोटी आंत की एक इंडोस्कोपिक बायोप्सी करना ही सीलिएक रोग की पुष्टि करने का एकमात्र रास्ता है.

लस असहिष्णु बच्चों और वयस्कों के केवल एक छोटे प्रतिशत का ही सीलिएक रोग की जांच में सकारात्मक परिणाम सामने आता है. गैर सीलिएक लस संवेदनशीलता (एनसीजीएस) अधिक आम है और प्रत्येक सात में से एक व्यक्ति को प्रभावित करती है. एक लस चुनौती आहार, शिशुओं में सीलिएक रोग के निदान के बाद महीनों या वर्षों तक प्रशासित किया जा सकता है क्योंकि सीलिएक रोग की अवस्थाएं अन्य कारणों जैसे माध्यमिक डीसैकराइड की कमी या दूध असहिष्णुता की वजह से भी पैदा हो सकती हैं.

सीलिएक रोग का एक ही प्रभावी उपचार है – आजीवन लस मुक्त आहार का सेवन करना. परहेज़ का कड़ाई से पालन आंतों को चंगा करने की अनुमति देता है और अधिकांश केसों में सभी लक्षणों को ख़त्म कर देता है, हालांकि एक बेचैनी पैदा करने वाला आंत्र सिंड्रोम लगातार बना रह सकता है.

भोजन और दमा

asthma_before01

जब पर्यावरण में मौजूद उद्दीपक वायु मार्ग और फेफड़ों में सूजन पैदा कर देते हैं, तो यह दमे की स्थिति बन जाती है. इसके मुख्य लक्षण हैं, घरघराहट, सांस की तकलीफ और खाँसी, जो हवा में मौजूद विभिन्न कणों या हवा के तापमान में अचानक परिवर्तन से पैदा होते हैं. हालांकि खाने से बढ़ने वाला दमा असामान्य है, फिर भी खाद्य एलर्जी दमा को प्रभावित कर सकती है और दोनों के एक तरह के लक्षण हो सकते हैं. खाद्य पदार्थ, जो कि दमा के दौरे को गति प्रदान कर सकते हैं, वे हैं: बेंजोएट, सल्फाइट्स या गैलेट और कुछ रंग एजेंट के रूप में रासायनिक एडिटिव; रोटी या पनीर के रूप में मिलने वाले प्राकृतिक खमीर और फंगी, डेयरी उत्पाद, गेहूं, अंडे, समुद्री भोजन, सोया, और मेवे.

कुछ खाद्य पदार्थ वायु मार्ग को विस्फारित करके और बलगम को पतला करके सांस लेने की प्रक्रिया को आसान बनाकर दमे के दौरे की गंभीरता को कम कर सकते हैं. इस श्रेणी में आने वाले मसालेदार या तीखे खाद्य पदार्थ जैसे मिर्च, गर्म सरसों, लहसुन और प्याज नसों को उत्तेजित करके और मुंह, गले और फेफड़ों में एक खास तरल पदार्थ को छोड़कर यह काम करते हैं. कुछ खाद्य पदार्थ जैसे प्याज, वसायुक्त मछली (ओमेगा -3 फैटी एसिड में उच्च), और कुछ अन्य विटामिन सी युक्त चीज़ें, सूजन हटाने वाले तत्वों से युक्त होने के कारण वायुमार्ग को साफ़ रखने में सहायक होती हैं. कैफीन युक्त पेय पदार्थ भी राहत प्रदान कर सकता है. बेशक, ये तेज़ मसाले या उत्तेजक पदार्थ शिशुओं या छोटे बच्चों के लिए उचित नहीं होते.

बड़े होने के साथ अगर बच्चे के रक्त परीक्षण पहले से कम एलर्जी मार्कर दिखाते हैं, तो उनके अधिक जल्दी दमे से छुटकारा पाने की संभावना बढ़ जाती है. केवल कुछ को ऐसा दमा होता है जो कि एलर्जी से बढ़ता है, और उन एलर्जियों में से केवल कुछ भोजन से होने वाली हो सकती हैं. अगर एक बच्चे को दैनिक दमा की दवा की जरूरत है, तो उन्हें इसे लेते रहना अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन दमा दवाओं के लंबे समय तक इस्तेमाल का दमा कम होने पर कोई प्रभाव नहीं होता है. यहाँ तक कि साँस से लिए जाने वाले स्टेरॉयड के उपयोग से भी दमे के कम होने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है. वास्तव में, अगर वे साँस स्टेरॉयड के साथ सुधार नहीं करते हैं तो बच्चों को एलर्जी ठीक होने से दमा ठीक हो जाने की संभावना अधिक होती है. चूंकि साँस स्टेरॉयड सूजन और एलर्जी उद्दीपकों के प्रति संवेदनशीलता को कम करते हैं, इसलिए यह एक संकेत है कि दमा एक एलर्जी के कारण नहीं पैदा हुआ हो सकता है.

दुग्ध उत्पादों को न पचा पाना

दूध और अन्य डेयरी उत्पादों में लैक्टोज असहिष्णुता बच्चों में एक आम निदान, और ज्यादातर वयस्कों के लिए शारीरिक रूप से सामान्य है. लैक्टोज दूध की मुख्य चीनी और जानवर मूल से प्राप्त होने वाली इकलौती महत्वपूर्ण चीनी है. लैक्टोज को पचाने के लिए और गैलेक्टोज और ग्लूकोज के बीच का बंधन तोड़ने के लिए आंतों में मौजूद एंजाइम लैक्टेज की आवश्यकता होती है. अधिकांश लोग, अन्य स्तनधारियों की तरह, बचपन के बाद लैक्टेज उत्पादन करने की क्षमता खो देते हैं. लैक्टेज का महत्वपूर्ण उत्पादन दो और पांच साल की उम्र के बीच रहता है.

लैक्टोज असहिष्णुता के लक्षण पाचन तंत्र में मौजूद एंटिरल बैक्टीरिया की वजह से होते हैं जो अनवशोषित लैक्टोज की सापेक्ष बहुतायत को चयापचयित करके आंतों में अतिरिक्त पानी और पेट में किण्वन से गैस का निर्माण करते हैं. इससे पेट में ऐंठन, सूजन, पेट फूलना, और दस्त हो सकते हैं.

निदान के लिए एक आम उपकरण हाइड्रोजन सांस परीक्षण है, जो लैक्टोज देने से पहले और उसके बाद अधूरे पाचन के सबूत के लिए जाँच करता है. ऊपरी या निचली एंडोस्कोपी से बायोप्सी द्वारा लैक्टेज की उपस्थिति या अनुपस्थिति के लिए परीक्षण कर सकते हैं.

नियमित आहार पैटर्न वाले सामान्य शिशुओं में लैक्टोज के अधूरे अवशोषण को  “कार्यात्मक लैक्टेज की कमी,” कहा जाता है, जो आमतौर पर जीवन के पहले सप्ताह में होती है और पांच महीने की उम्र तक रह सकती है. प्राथमिक लैक्टेज की कमी, जिसे सामान्यतः लैक्टेज गैर हठ (LNP) के नाम से जाना जाता है, मां का दूध पीना बंद करने के बाद शुरू होती है और छह साल से ऊपर की उम्र के बच्चों में बहुत आम है. माध्यमिक लैक्टेज गैर हठ छोटी आंत के म्यूकोसा को आंत्रशोथ, गाय के दूध के प्रोटीन से असहिष्णुता, या सीलिएक रोग से पहुंचे नुक्सान का परिणाम है. जन्मजात लेक्टेसिया या हायपोलेक्टेसिया, एक अत्यंत दुर्लभ स्थिति है, जो स्कैंडिनेविया में मुख्य रूप से पायी जाती है, जिसमें शिशुओं का वजन नहीं बढ़ पाता और वे पनपने में असफल रह जाते हैं. निदान करते वक़्त  एक दूध एलर्जी और लैक्टोज असहिष्णुता में अंतर करना चाहिए (देखें नीचे).

दूध से एलर्जी

दूध में मौजूद एक या एक से अधिक प्रोटीनों से एलर्जी की प्रतिक्रिया पेट की ख़राबी और ऐसे ही अन्य लक्षणों के साथ शिशु को उधम मचाने वाला और चिड़चिड़ा बना सकती है. कई बच्चों को, जिन्हें गाय के दूध से एलर्जी होती है, उन्हें बकरी और भेड़ के दूध से भी एलर्जी हो सकती है, और कुछ बच्चों को सोया दूध में मौजूद प्रोटीन से एलर्जी हो सकती है. स्तनपान कर रहे शिशुओं में फॉर्मूला पर पलने वाले शिशुओं की तुलना में दूध एलर्जी विकसित होने की संभावना कम होती है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसा क्यों होता है कि कुछ बच्चों में दूध की एलर्जी होती है और कुछ में नहीं. एलर्जी के कई केसों में आनुवंशिक गड़बड़ी भी एक कारण हो सकती है.

एक दूध एलर्जी के लक्षण आमतौर पर जीवन के पहले कुछ महीनों के भीतर दिखाई देते हैं. एक धीमी शुरुआत की प्रतिक्रिया ज्यादा आम है, जो गाय का दूध लेने के एक या दो सप्ताह बाद शुरू हो जाती है, और इसके लक्षणों में ढीला मल, उल्टी, गला रुक जाना, खाने से इनकार, पेट का दर्द, या चकत्ते हो जाना शामिल हैं. तेजी से शुरु होने वाली प्रतिक्रियायें कम बच्चों में होती हैं, और कुछ खिलाने के बाद अचानक हो जाती हैं और इनमें उल्टी, घरघराहट, सूजन या पित्ती शामिल हैं. तीव्रग्राहिता भी हो सकती है, लेकिन यह संभावित गंभीर प्रतिक्रिया दूध एलर्जी के बजाय अन्य खाद्य एलर्जियों में ज्यादा आम है.

दूध एलर्जी के निदान के लिए कोई एक परीक्षण नहीं है और इसके लक्षण लैक्टोज असहिष्णुता और अन्य स्वास्थ्य की स्थितियों से मिलते-जुलते हो सकते हैं. एक बच्चों का चिकित्सक एक लैट्रिन और रक्त परीक्षण के अलावा एक त्वचा परीक्षण का आदेश दे सकता है. कभी-कभी मौखिक चुनौती परीक्षणों को दोहराना निदान की पुष्टि करने के लिए आवश्यक हो जाता है.

अगर बच्चा स्तनपान करता है, तो इलाज में मां के आहार में डेयरी उत्पादों को सीमित करना शामिल होता है, जिसके साथ कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों के वैकल्पिक स्रोत भी दिए जाने चाहिए. अगर बच्चा फार्मूला आहार ले रहा है, तो बच्चों का चिकित्सक एक सोया आधारित फार्मूले की सलाह दे सकता है. अगर सोया सहन नहीं होता है, तो फिर एक और हाइपोएलर्जेनिक फार्मूले की सिफारिश की जा सकती है. बकरी का दूध, चावल दूध और बादाम का दूध शिशुओं के लिए नहीं सुझाया जाता. एक बार दूध से दूर कर दिए जाने के बाद लक्षण कुछ हफ्तों के भीतर गायब होजाते हैं. अधिकांश बच्चों में दो साल की उम्र तक आते-आते यह एलर्जी ठीक हो जाती है, लेकिन कभी-कभी यह बड़े होने तक भी रह सकती है.

मूंगफली और मेवों से एलर्जी

मूंगफली में मौजूद पदार्थों के लिए एलर्जी की प्रतिक्रिया या अतिसंवेदनशीलता करीब 1% बच्चों और वयस्कों में लक्षणों की एक श्रृंखला को बढ़ावा दे सकती है. इसके लक्षणों में बार-बार पेशाब आना, हाइपोटेंशन, पित्ती, निस्तब्धता, उल्टी, खुजली, और श्वासनली में खिंचाव शामिल हो सकते हैं. सबसे गंभीर मामलों में एनाफाईलेक्सिस हो सकता है, जिसमें तत्काल चिकित्सा और एपिनेफ्रीन के साथ उपचार की आवश्यकता होती है. हालाँकि अधिकांश एलर्जियों में परहेज़ से रहना ही सबसे प्रभावी उपचार होता है, लेकिन मूंगफली से एलर्जी वाले 25% के आसपास बच्चे इससे छुटकारा पाने में सफल हो जाते हैं.

मेवों से एलर्जी मूंगफली की एलर्जी से इस मायने में अलग है कि वे अलग-अलग घटकों वाले विभिन्न खाद्य पदार्थों की वजह से पैदा होती हैं, और एक चीज़ से एलर्जी होने पर यह ज़रूरी नहीं है कि दूसरी चीज़ से भी एलर्जी हो ही, हालांकि ये दोनों एक ही व्यक्ति में भी हो सकती हैं. मेवों से एलर्जी के लक्षण काफी कुछ मूंगफली एलर्जी जैसे ही होते हैं. यह मुख्य रूप से बच्चों में पाई जाती है, मूंगफली एलर्जी से कम आम हो सकती है, और आमतौर पर इसका इलाज भी संदिग्ध मेवों, उनके अंशों और तेलों के बहिष्कार और परहेज़ के द्वारा ही किया जाता है.

इओसिनोफिलिक ग्रासनलीशोथ

eosinophilic

इओसिनोफिलिक ग्रासनलीशोथ (ईई) इओसिनोफिल्स, जो सफेद रक्त कोशिकाओं का एक प्रकार हैं, की एक बड़ी संख्या के श्वासनली में घुसपैठ के कारण होता है और इससे उसमें सूजन आ जाती है. इओसिनोफिल्स प्रतिरक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो परजीवियों की वजह से पैदा हुए कुछ खास प्रकार के संक्रमणों को रोकता है. कुछ उद्दीपक, जिनमें कुछ खाद्य भी सम्मिलित हो सकते हैं, इओसिनोफिल्स के असामान्य उत्पादन और संग्रहण को गति प्रदान कर सकते हैं.

ईई के साथ लोगों को अक्सर दमा या एक्जिमा जैसी अन्य एलर्जी भी हो जाती है. ईई सभी उम्र, लिंग और जातीय पृष्ठभूमि के लोगों को प्रभावित कर सकते हैं. कुछ परिवारों में, विरासत में मिली प्रवृत्ति या आनुवंशिक गड़बड़ी हो सकती है. ईई इओसिनोफिल्स से जुड़े जठरांत्र विकार का सबसे आम प्रकार माना जाता है.

ईई के निदान में अक्सर इस विकार के बारे में जागरूकता की कमी और विशिष्ट नैदानिक ​​मानदंडों के प्रति असहमति की वजह से देरी हो जाती है, जो कई सालों की भी हो सकती है, लेकिन अधिकांश मामलों में बायोप्सी के साथ इसकी पुष्टि की जा सकती है. कुछ दुर्लभ मामलों में, रिफ्लक्स रोग (गर्ड) से इओसिनोफिलिक ग्रासनलीशोथ का अंतर करना मुश्किल हो सकता है.

ईई वाले अधिकांश बच्चे आहार उपचार के लिए अनुकूल प्रतिक्रिया देते हैं. एक बार लक्षण ठीक हो जाने के बाद खाद्य एलर्जी के परीक्षण द्वारा निर्देशित और खाद्य परीक्षणों द्वारा निर्धारित भोजनों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है. यदि आहार में बदलावों से तकलीफ ठीक न हो पाए, तो ईई की चिकित्सा में सूजन को नियंत्रित करने और इओसिनोफिल्स को दबाने के लिए मुख्यतः स्टेरॉयड का उपयोग किया जाता है.

प्रमुख एलर्जी साइटों के लिंक

उद्धरण

  1. Metcalfe, Dean D., Hugh A. Sampson, and Ronald A. Simon, eds. 1997. Food Allergy: Adverse Reactions to Foods and Food Additives. 2nd ed. Cambridge, MA:Blackwell Science.
  2. Allergies and Intolerance in Children: www.ncbi.nlm.nih.gov.