आहार चिकित्सा व्यवहार

व्यवहार विश्लेषण क्या है?

व्यवहार विश्लेषण वातावरण की स्थिति, व्यवहार और परिणाम के बीच संबंध का अध्ययन है. एक बाल आहार चिकित्सा मामले में व्यवहार विश्लेषण का एक उदाहरण यहाँ दिया गया है:

भोजन के साथ मेज पर बैठा (वातावरण परिस्थिति) एक बच्चा प्लेट से खाना लेकर चबाता है और निगलता (व्यवहार) है. नतीजतन, बच्चे को तृप्ति मिलती है (परिणाम).

जब आहार-व्यवहार में परिवर्तन की जरूरत होती है, तो एक व्यवहार चिकित्सक खाने के व्यवहार और वातावरण की स्थिति के बीच के रिश्ते, साथ ही खाने के व्यवहार और उनके परिणामों के बीच के रिश्ते को बदलता है.

एक सुदृढ़कर्ता क्या है?

किसी सुदृढ़कर्ता एक उद्दीपक या घटना है, जो एक खास व्यवहार के बाद होती है और भविष्य में उस विशेष व्यवहार के होने की संभावना को बदल देती है. उदाहरण के लिए:

एक बच्चे को भोजन का एक टुकड़ा दिया जाता है, वह उसके लिए मुंह खोलता है और भोजन को स्वीकार कर लेता है. ग्रास लेने के बाद, खिलाने वाला कहता है, “बहुत बढ़िया!”

तो अगर यह बहुत बढ़िया!” कहना भविष्य में और अधिक मुंह खुलने की ओर जाता है, तो बच्चे को यह वाक्यांश कहना एक सुदृढ़कर्ता माना जाएगा.

व्यवहार विश्लेषण के बारे में गलतफहमियां

यह एक आम धारणा है कि खिलाने में व्यवहार विश्लेषण के प्रयोग का अर्थ है कि बच्चा किसी प्रकार का दुर्व्यवहार करता है.

हालांकि, यह कहना अधिक सटीक है कि व्यवहार चिकित्सक विभिन्न आहार व्यवहार की दरों को बदल देता है, जब तक कि इनके वितरण से सेवन की एक इष्टतम राशि प्राप्त न हो – चाहे मात्रा, समय या उम्र की उपयुक्तता में से किसी भी हिसाब से.

एक और गलत धारणा है कि व्यवहार विश्लेषण खिलाने की समस्या के लिए कुछ ज्यादा ही सरल या एकपक्षीय है.

वास्तविकता यह है कि व्यवहार विश्लेषण एक जटिल अध्ययन है. इसमें अनेक परिवर्तनशील कारक हैं, जिन्हें व्यवहार अधिग्रहण में तेजी लाने के साथ ही नव स्थापित व्यवहार को मजबूत करने के लिए भी समायोजित किया जा सकता है.

किन व्यवहारों को लक्षित किया जाता है?

ग्रास स्वीकृति

जब एक बच्चा, जो अपने आप नहीं खाता है, खाने की चम्मच को देखकर कुछ सेकंड के भीतर मुंह खोल लेता है, तो इसे ग्रास स्वीकृति कहा जाता है.

पैकिंग

इसे कभी-कभी ‘पॉकेटिंग’ या ‘स्क्विरलिंग’ भी कहा जाता है. पैकिंग का अर्थ है, खाने के एक टुकड़े को (स्वयं खाया गया हो या नहीं) देर तक मुँह में जमा रखना, और उसे एक सामान्य समय के भीतर निगला नहीं जाना. पैकिंग को दो श्रेणियों में रखा जा सकता है:

  1. पैकिंग भोजन के प्रकार के अनुसार चयनात्मक हो सकती है. उदाहरण के लिए, एक चुनिंदा चीज़ें खाने वाला एक सेब या अन्य फलों को मुँह में नहीं रखकर बैठता, लेकिन ब्रोकली के साथ ऐसा करता है. इस प्रकार की पैकिंग के लिए खाद्य इनकार को जिम्मेदार ठहराया जाने की अधिक संभावना होती है.
  2. पैकिंग बनावट के अनुसार भी चयनात्मक हो सकती है. उदाहरण के लिए, अगर एक बच्चा प्यूरी को मुँह में रखकर नहीं बैठता, लेकिन उसी खाने की वस्तु को गैर प्यूरी रूप में पैक करता है, तो इस प्रकार की पैकिंग के लिए चबाने या मुँह में किसी विशिष्ट बनावट से व्यवहार करने में सक्षम होने की योग्यता की कमी को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है.

खाद्य पदार्थों का गाढ़ापन भी पैकिंग में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. एक बच्चा जो एक लंबे समय के लिए आहार नली पर रहा हो, अक्सर प्यूरी को पैक कर सकता है. ऐसे बच्चों को उनकी लार से अधिक गाढ़ा खाना निगलने की आदत नहीं होती. ऐसे मामलों में, गाढ़ी चीज़ों को निगलने की योग्यता की कमी होती है.

पैकिंग की किसी भी श्रेणी को खत्म कर देने से उलटे अनुपात में निगलने की दर बढ़ जाती है.

पूलिंग

यह पैकिंग के समान है, सिवाय इसके कि यह ठोस की बजाय तरल पदार्थ के साथ होता है.

उल्टी

उल्टी का अर्थ है खाद्य पदार्थों को खा लेने के बाद फिर मुंह से निष्कासित कर देना. ऐसे कई कारक हैं जो उल्टी का कारण हो सकते हैं, जैसे रिफ्लक्स, गतिशीलता मुद्दे, एलर्जी, आहार नली, एक पुराने सुलझाये जा चुके चिकित्सा मुद्दे के कारण पैदा हुई कोई आदत, भोजन का गाढ़ापन, भोजन की बनावट और पिछले और वर्तमान आहार के बीच का समय. कई व्यवहार-आधारित प्रक्रियायें हैं जो उल्टी की आवृत्ति को पूरी तरह से खत्म नहीं भी, तो कम अवश्य कर सकती हैं.

संयुक्त अनुचित व्यवहार (सीआई)

इसमें सिर को घुमाना, धड़ को 180 डिग्री से अधिक मोड़ लेना, चम्मच को दूर हटाना और लात मारना शामिल है. आमतौर पर, एक व्यवहार आधारित दृष्टिकोण में इन कार्यों की दर में कमी करना शामिल है.

निष्कासित करना

यह एक ग्रास को मुंह में देर तक रखे रहने और फिर बिना निगले उसे बाहर निकाल देने को संदर्भित करता है. यह “पैकिंग” शीर्षक के तहत ऊपर उल्लिखित कुशलताओं की कमी के साथ या उनके बिना भी हो सकता है. उचित उपचार लागू करने के लिए, यह महत्वपूर्ण है कि व्यवहार चिकित्सक निष्कासन का कारण निर्धारित करने के लिए एक अच्छा आकलन करे. निष्कासन तरल पदार्थ के साथ भी होता है.

पिका

यह तब होता है जब एक बच्चा खिलौने या कंघे जैसी गैर-खाद्य वस्तुओं को निगलने की कोशिश करता है. पिका उन गैर खाद्य वस्तुओं की ओर इशारा नहीं करता, जो आम तौर पर शिशु उठाकर मुँह में डाल लेते हैं.

जुगाली

यह उल्टी कर दिए गए भोजन के दोबारा निगलने को संदर्भित करता है. यह तब होता होता है, जब उल्टी मुंह से बाहर न आकर गले तक ही आकर रह जाती है. उल्टी और दोबारा निगलने का यह चक्र एक समय में कई घंटों तक चल सकता है.

व्यवहार विश्लेषणात्मक पद्धति द्वारा आहार रोगों का इलाज

behavioral feeding therapyखाने के समय मौजूद हो सकने वाले व्यवहारों का वितरण अनंत संख्या में होता है. यदि सेवन की मात्रा या भोजन में विविधता में कमी हो, तो आहार व्यवहार का विश्लेषण किया जाना चाहिए:

  1. कुछ व्यवहार सेवन के साथ हस्तक्षेप करते हैं, जैसे उल्टी, सिर घुमाना, रोना, निष्कासन या चम्मच को परे धकेलना.
  2. वांछित व्यवहार – जैसे मुंह खोलना, निगलना या चबाना – दिखाई तो देते हैं, लेकिन इष्टतम दर से कम पर.
  3. कई बार जब एक व्यवहार के होने की जरूरत होती है, तो वह दिखाई नहीं देता. इस तरह के व्यवहार को शुरू से ठीक करने की जरूरत होती है.

एक बार जब विश्लेषण पूरा हो जाता है, तो प्रत्येक व्यवहार को, जिसे सेवन के स्तर में सुधार करने के लिए लक्षित किया जाना चाहिए, संबोधित करने के लिए एक उपचार योजना तैयार की जा सकती है. ऐसे कई उपचार हैं जिन्हें एक विशेष व्यवहार को संबोधित करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. महत्वपूर्ण यह है कि उपचार का ऐसा संयोजन प्रयोग किया जाये, जो हर आहार व्यवहार को ठीक कर सकता हो.

यह दृष्टिकोण निदान पर नहीं, बल्कि व्यवहार पर ध्यान केंद्रित करता है. चाहे बच्चे को ऑटिज्म, डाउन सिंड्रोम या सेरेब्रल पाल्सी हो या विकासात्मक रूप से वह सामान्य हो, यह सब अप्रासंगिक है. सबसे ज़रूरी बात है, कि:

  1. बच्चा क्या कर रहा है
  2. किस व्यवहार पर सुधार किये जाने की जरूरत है
  3. किस व्यवहार को कम होने की जरूरत है

उपचार की प्रक्रिया जटिल हो सकती है, क्योंकि:

  1. एक दिये गए परीक्षण के भीतर कई व्यवहारों को लक्षित किए जाने की जरूरत होती है.
  2. विभिन्न लक्षित व्यवहारों में से कुछ को क्रमिक रूप से घटित होने के लिए ठीक करने की जरूरत होती है.
  3. चबाने जैसे कुछ व्यवहारों का उपचार जटिल हो सकता है, क्योंकि उदाहरण के लिए, चबाने की प्रक्रिया में एक से अधिक व्यवहार समाहित होते हैं. यही बात निगलने पर भी लागू होती है.

बाल आहार विकारों के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण का उपयोग करने के लाभ

इस दृष्टिकोण का उपयोग करने के कई लाभ हैं.

  1. व्यवहार विश्लेषण का प्रयोग थेरेपी को काफी व्यक्तिगत बनाता है. क्योंकि ध्यान व्यवहार वितरण पर होता है, अतः इस विधि से आहार चिकित्सा पूरी तरह बच्चे की ज़रूरत के हिसाब से की जा सकती है.
  2. कभी कभी आहार व्यवहार में आवश्यक परिवर्तन बच्चे के स्वास्थ्य और उसकी भलाई के लिए अति महत्वपूर्ण होते हैं. सही ढंग से लागू करने पर, आहार-व्यवहार में वांछित परिवर्तन शीघ्रता से प्राप्त हो सकते हैं.
  3. व्यवहार आधारित आहार चिकित्सा के प्रभाव लंबे समय तक चलते हैं.
  4. एबीए प्रकार की आहार चिकित्सा देने पर सफलता की दर काफी ऊंची होती है.