दूध पिलाने के दिशा निर्देश

बच्चों के लिए पोषण का अवलोकन

जब हम पोषण की बात करते हैं, तो माता-पिता के रूप में आपके द्वारा चुने गए विकल्प आपके बच्चे के जीवन की गुणवत्ता पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं. अच्छा प्रसव पूर्व पोषण तो भ्रूण की भलाई सुनिश्चित करने में मदद करता ही है, लेकिन उसके बाद (और विशेष रूप से जीवन के पहले दो वर्षों के दौरान) भी पोषण एक बच्चे के स्वास्थ्य – शारीरिक विकास, मानसिक विकास और समग्र स्थिति – को प्रभावित करने में लगातार एक आवश्यक भूमिका निभाता है.

छोटी उम्र से ही खाने की अच्छी आदतों को प्रोत्साहित करने से आपके बच्चे को बाद में जीवन में स्वस्थ निर्णय लेने में मदद मिलती है, जिससे वजन से संबंधित या पोषण की कमी से होने वाली बीमारियों का खतरा कम हो जाता है. दूसरी ओर कुपोषण बीमारियों, अवरुद्ध विकास, अपूर्ण बौद्धिक विकास या यहां तक कि कुछ चरम मामलों में मौत का कारण भी हो सकता है.

मुख्य पोषक तत्व, जिनकी बच्चों को आवश्यकता होती है, निम्नलिखित हैं:

  1. कार्बोहाइड्रेट (सरल, जटिल और फाइबर), जो ऊर्जा देते हैं और पाचन में सहायता प्रदान करते हैं. स्रोत: फल, सब्जियां, सेम, नट, बीज.
  2. स्वस्थ (असंतृप्त) वसा ऊर्जा प्रदान करने, तंत्रिका स्वास्थ्य को बनाए रखने और हार्मोन का उत्पादन करने के लिए. स्रोत: स्वास्थ्यप्रद तेल जैसे जैतून और कनोला, एवोकैडो, मेवे, वसायुक्त मछली.
  3. प्रोटीन ऊर्जा, और कोशिकाओं के निर्माण व मरम्मत आदि के लिए. स्रोत: डेयरी खाद्य पदार्थ, लीन मीट, मेवे, फलियां, सेम, मछली, दालें.
  4. विटामिन (ए, बी, सी, डी, ई, के) दृष्टि, त्वचा, बाल, और तंत्रिका तंत्र के लिए. स्रोत: फल, सब्जियां, डेयरी पदार्थ, साबुत अनाज.
  5. खनिज शरीर के विभिन्न भागों और कार्यों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए (कैल्शियम, आयोडीन, आयरन, जिंक, पोटेशियम, मैग्नीशियम और अन्य). स्रोत: मछली, अंडे, मेवे, मीट, डेयरी खाद्य पदार्थ, हरी पत्तेदार सब्जियां.
  6. पानी, जो पाचन, रक्त परिसंचरण, अपशिष्ट उत्पादों के उन्मूलन, शरीर के एक आदर्श तापमान को बनाए रखने और अन्य कई कार्यों में भी मदद करता है.
  7. निम्नलिखित को यथासंभव सीमित किया जाना चाहिए: संतृप्त वसा, ट्रांस वसा और कोलेस्ट्रॉल. स्रोत: पशु उत्पाद, नारियल का तेल, फास्ट फूड.

नीचे बच्चे के जीवन के नवजात, शिशु और प्रीस्कूल चरणों में पोषण आवश्यकताओं का एक सामान्य अवलोकन दिया गया है. ध्यान दें कि सुझावित कैलोरी, सेवन और आहार केवल एक दिशा-निर्देश के रूप में कार्य करते हैं; आहार के बारे में निर्णय लेते समय, माता-पिता या अभिभावक को अपने बच्चे के वजन को और साथ ही भूख, तृप्ति और विशिष्ट आहारों के लिए प्रतिक्रियाओं के संकेतों को भी ध्यान में रखना चाहिए.

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0-12 महीने

जीवन के इस प्रारंभिक चरण में, शिशु के मस्तिष्क का तेजी से विकास होने के कारण सही मात्रा में पोषण अति आवश्यक है. जीवन के पहले चार से छह महीने में शिशु के लिए, खाद्य और तरल पदार्थ की खपत केवल मां के दूध से होती है. स्तनपान दो साल तक  जारी रखा जाना चाहिए; उसके बाद यह माँ और बच्चे की पसंद पर निर्भर करता है.

मानव दूध एक ऐसा अनूठा पदार्थ है जो एक शिशु की पोषण संबंधी जरूरतों को बढ़िया तरीके से पूरा करता है. मां के दूध में सभी आवश्यक पोषक तत्व जैसे कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, जिंक, थायमिन, राइबोफ्लेविन, विटामिन आदि मौजूद होते हैं. इसके अलावा, इस तरह के दूध में विलेय पदार्थों की मात्रा कम होती है और इसमें अन्य किसी भी प्रकार के दूध की तुलना में अधिक असंतृप्त फैटी एसिड होता है. मां के दूध का प्रोटीन और वसा अधिक आसानी से पच जाता है और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बच्चे की विकास दर के लिए पूरी तरह अनुकूल होती है.

मां के दूध के अलावा, बच्चों को 400 आइयू का एक दैनिक विटामिन डी पूरक भी दिया जाना चाहिए. इस पूरक का सेवन तब तक जारी रखा जाना चाहिए, जब तक बच्चा दो वर्ष का न हो जाये या जब तक वह विभिन्न खाद्य पदार्थ खाने और होमोजनित दूध न पीने लगे. परिस्थितियों पर निर्भर करते हुए, एक दैनिक फ्लोराइड पूरक की भी जरूरत हो सकती है. कभी कभी अनुपूरक आहार के रूप में पानी, ग्लूकोज का पानी, पतला फ़ॉर्मूला या पूर्ण-शक्ति फ़ॉर्मूला भी दिया जाता है.

यदि माता-पिता ने बच्चे को मां के दूध के बजाय फ़ॉर्मूला देने का फैसला किया है, तो यह महत्वपूर्ण है कि ऐसा फॉर्मूला चुना जाये, जिसका पोषण प्रोफ़ाइल मानव दूध से अधिकाधिक मिलता-जुलता हो. फॉर्मूला को निम्न आवश्यकताओं को पूरा करना चाहिए:

  1. उसमें प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट से आ रही कैलोरी का सही वितरण हो.
  2. आसानी से पचने वाला हो.
  3. ऊर्जा, पानी, विटामिन और खनिज के लिए शिशु की जरूरतों को पूरा करता हो.

गाय के दूध को 1 साल की उम्र तक आहार में शामिल नहीं किया जाना चाहिए. इसके अलावा, कुछ शिशु गाय के दूध के प्रति संवेदनशील होते हैं और इससे एलर्जी के परिणामस्वरूप उन्हें एक्जिमा, उल्टी, दस्त और ऊपरी श्वास नलिका में संक्रमण हो सकता है. शाकाहारी आहार पर पलने वाले बच्चों को सोया फार्मूला दिया जाता है. फ़ॉर्मूला के लिए सुझावित पोषक तत्व सामग्री में, तरल के प्रति 3.38 फ्लू. औंस (100 मिलि.) के लिए निम्नलिखित मानक शामिल हैं.

  1. प्रोटीन: 0.04-0.10 औंस (1.2-2.9 ग्रा.)
  2. वसा: 0.7-0.14 औंस (2.1-3.9 ग्रा.)
  3. ऊर्जा (जिसमें से 40-50% कार्बोहाइड्रेट हों): 65 किलो कैलोरी

जहाँ तक स्तनपान और फ़ॉर्मूला दोनों की आवृत्ति का प्रश्न है, आहार बच्चे की मांग पर खिलाया जाना चाहिए. प्रारंभ में, यह आम तौर पर हर दो से तीन घंटे में दिया जा सकता है. (नवजात शिशुओं को दिन में आठ से 10 बार दूध पिलाना होता है). शून्य से दो सप्ताह पर दैनिक आहार की संख्या लगभग छह से आठ होनी चाहिए; दो सप्ताह से दो महीने तक के लिए पांच से छह आहार; और तीन महीने में, चार-पाँच आहार.

इन आहारों के दौरान सेवन की राशि बच्चे के मल-मूत्र के पैटर्न पर निर्भर करती है और दूध पिलाने का समय बच्चे की संतुष्टि पर निर्भर करता है. आम तौर पर, यह समय प्रति स्तन पांच से तीस मिनट तक हो सकता है. यदि फ़ॉर्मूला दिया जा रहा है, तो दैनिक मात्रा इस प्रकार है:

  1. शून्य से तीन महीने के लिए: 18-32 फ्लू. औंस (532-946 मिलि.)
  2. चार से छह महीने के लिए: 28-40 फ्लू. औंस (828-1183 मिलि.)
  3. सात से नौ महीने के लिए: 24-36 फ्लू. औंस (710-1065 मिलि.)
  4. दस से बारह महीने के लिए: 18-30 फ्लू. औंस (532-887 मिलि.)

जीवन के पहले छह महीनों के लिए, एक स्वस्थ शिशु के लिए ऊर्जा की आवश्यकता प्रति दिन 650 किलो कैलोरी है. समय से पहले जन्मे बच्चों को थोड़ी अधिक मात्रा की आवश्यकता होगी. इस मात्रा में सेवन के साथ, शिशु के वज़न में सामान्य रूप से 0.88-1.06 औंस (25-30 ग्रा.) प्रति दिन की वृद्धि होनी चाहिए. कुल मिलाकर, पहले चार महीनों में लगभग 7.7 एलबी (3.5 किलो) वज़न बढ़ना चाहिए.

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0-12 Months Growth Chart (boy)

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0-12 Months Growth Chart (girl)

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4/6-12 महीने

चार से छह महीने और उसके बाद से, ठोस खाद्य पदार्थ खिलाना शुरू करने की ज़रुरत होती है क्योंकि अब मां का दूध / फ़ॉर्मूला बच्चे की ऊर्जा और पोषक तत्वों (यह उनमें से आधे प्रदान करता है) की आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ नहीं होता. इस उम्र में शिशुओं को प्रतिदिन 850 कैलोरी की ज़रुरत होती है, जिसमें मां का दूध, भोजन (दिन में दो से चार बार) और नाश्ता (वैकल्पिक, दिन में एक या दो बार) शामिल है. पानी भी आहार में शामिल किया जाना चाहिए.

आपका बच्चा ठोस आहार के लिए तैयार है, इसके संकेतों में ये शामिल हैं:

  1. उनका वजन जन्म के समय के वज़न से दुगुना हो गया है.
  2. उन्हें एक दिन में आठ बार से अधिक स्तनपान की आवश्यकता होती है.
  3. वे अक्सर भूखे लगते हैं (मां के दूध / फ़ॉर्मूला से संतुष्ट नहीं).

आहार में ठोस खाद्य जोड़ने के लक्ष्यों में से एक है, बच्चे को विभिन्न जायकों और बनावटों के साथ प्रयोग करना सिखाना. नए खाद्य पदार्थों को एक-एक करते हुए ही शुरू करें, जिससे एलर्जी स्रोतों की आसानी से पहचान की जा सके. शुरू-शुरू में बच्चा उन्हें थूकता हुआ (जीभ से बाहर धकेलते हुए) प्रतीत हो सकता है. इसे “निष्कासन परावर्तन” के रूप में जाना जाता है. कभी कभी, आपको एक खास भोजन को स्वीकार किये जाने से पहले कई बार पेश करना पड़ सकता है.

ठोस जो कि आप दे सकते हैं, उनमें चावल का सीरियल, जौ या दलिया, सूप, नाशपाती या केले जैसे फल, पकायी हुई सब्जियां, हार्ड बॉईल अंडे की जर्दी और बिना वसा के मांस शामिल हैं. ध्यान रखें कि इन्हें बिना मिर्च-मसाले का और बहुत नरम होना चाहिए. (आदर्श रूप से मसला हुआ, पीसा हुआ, बारीक कटा या लुगदी किया हुआ आदि). यदि शाकाहारी आहार दिया जा रहा है, तो प्रत्येक भोजन में खाद्य पदार्थों की विविधता होनी चाहिए; पोषक तत्वों से भरी फलियों और हरी पत्तेदार सब्जियों पर विचार करें. विभिन्न रस भी दिये जा सकते हैं; हालांकि, इस बिंदु पर मिठाई / डेज़र्ट को आहार में शामिल नहीं किया जाना चाहिए.

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1–3 Years Old Growth Chart (boy)

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1–3 Years Old Growth Chart (girl)

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1-3 साल

इस उम्र के दौरान आवश्यक कैलोरी की मात्रा आम तौर पर उम्र, विकास और गतिविधि के स्तर पर निर्भर करती है; हालांकि, प्रति दिन मानक कैलोरी 1,000-1,400 है. एक से दो साल की उम्र में, मां का दूध एक बच्चे की ऊर्जा और पोषक तत्वों की जरूरतों का एक तिहाई पूरा करता है. शेष दो तिहाई को प्रति दिन तीन या चार भोजन व साथ ही एक या दो नाश्तों (बच्चे की पसंद के अनुसार) द्वारा दिया जाना चाहिए. उम्र बढ़ने के साथ, मां के दूध का सेवन कम होता जाता है, जबकि खाद्य से कैलोरी का सेवन बढ़ता जाता है.

इस चरण में तरल पदार्थ की आवश्यकता आमतौर पर 2 फ्ल. औंस/पौंड (125 मि.ग्रा./किलो) होती है. पूरक आहार (ठोस) को विशेष रूप से प्रोटीन, ऊर्जा और सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे लोहा, कैल्शियम और विटामिन ए और सी से समृद्ध होने की जरूरत है. अतिरिक्त पोषक तत्वों में वसा, पोटेशियम, क्लोराइड, नियासिन और एस्कॉर्बिक एसिड शामिल हैं. हालांकि, ऊर्जा की ज्यादा मात्रा वसा द्वारा प्राप्त नहीं की जानी चाहिए और चीनी से परहेज किया जाना चाहिए. यहां दिए जा सकने वाले कुछ विशेष प्रकार के खाद्य पदार्थ या भोजनों के  उदाहरण दिए जा रहे हैं:

  1. अनाज, साबुत अनाज की ब्रेड और क्रैकर
  2. स्ट्रॉबेरी और खट्टे फल
  3. कच्ची या पकी सब्जियां: स्ट्रिंग सेम, स्क्वैश, गाजर, पालक, ब्रोकोली, कैल, शिमला मिर्च, आलू
  4. कॉटेज और सख्त चीज
  5. दूध और अंडे
  6. टूना मछली, लीन मीट, अंडा
  7. पीनट बटर
  8. गाढ़ा सूप, स्ट्यू, और कैसरोल
  9. फोर्टीफाईड आहार और / या विटामिन-खनिज की खुराक की भी आवश्यकता हो सकती है

ध्यान दें कि 12 से 18 महीने के दौरान, बच्चों की विकास दर धीमी हो जाती है, लेकिन उनकी गतिविधि बढ़ जाती है. इसके अलावा, इसके लिए भी तैयार रहें कि वे भोजन से इनकार कर सकते हैं, केवल कुछ खास खाद्य पदार्थ ही खा सकते हैं या उन्हें हर थोड़ी देर में हलकी-फुलकी भूख लग सकती है. चुनिंदा खाने की आदत का भी विकास हो सकता है.

3-5 साल

इस उम्र में 1800 कैलोरी/दिन की आवश्यकता होती है. इस स्तर पर, प्रति दिन तीन मुख्य भोजन और दो या तीन नाश्ते का एक नियमित कार्यक्रम शुरू कर दें. इस आयु वर्ग के बच्चे आमतौर पर वह सब खा सकते हैं, जो बाकी परिवार खाता है, लेकिन कम मात्रा में. जब भोजन और नाश्ते की बात आती है, तो विचार करने लायक कुछ सामान्य सुझाव यहाँ दिए गए हैं:

  1. परिष्कृत अनाजों की मात्रा सीमित रखें और ब्राउन ब्रेड, जई और गेहूं के पास्ता जैसे खाद्य पदार्थों पर जोर दें.
  2. अपने बच्चे की प्रोटीन की ज़रूरतों के लिए फ्री-रेंज अंडे, लीन मीट और मेवों को चुनें.
  3. अपने बच्चे को तला हुआ भोजन देने से बचें. ग्रिल किये, उबले या भुने हुए खाद्य पदार्थों का चयन करें.
  4. सोडे और ऊर्जा पेयों के बजाय, स्वस्थ तरल पदार्थों, जैसे पानी, दूध, हर्बल चाय, ताज़ा निचोड़े गए रस आदि के सेवन को प्रोत्साहित करें.

शिशुओं की स्वस्थ हड्डियों और दांतों के लिए आवश्यक कैल्शियम की दैनिक आवश्यकता 12.35 ग्रा. (800 मिलीग्राम) होती है. यह दूध, दही, सख्त चीज़ और आइसक्रीम (यह निश्चित रूप से सीमित मात्रा में होनी चाहिए) के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है. बच्चों को प्रत्येक दिन पर्याप्त प्रोटीन की भी जरूरत होती है, जो अंडे, सूखे मेवों, मछली, लीन मीट और फलियों से प्राप्त किया जा सकता है.

इस बिंदु पर पर्याप्त लोहे की मात्रा का सेवन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है; मांस के अलावा, –लौह परिपूर्ण अनाज, अंडे, और हरी पत्तेदार सब्जियां इस आवश्यकता को पूरा कर सकते हैं. विटामिन सी के स्रोतों पर भी विचार करें, जैसे संतरे का रस, क्योंकि यह लोहे के अवशोषण को बढ़ाता है. अन्त में, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को विटामिन ए, सी और डी का एक दैनिक पूरक भी दिया जाना चाहिए.

इस चरण और उसके बाद से, आपका बच्चा भी अपने स्वयं के पोषण के लिए कुछ हद तक जिम्मेदार होगा. ये कुछ बुनियादी दिशा निर्देश हैं, जिनका वह एक स्वस्थ आहार को अपनाने और बनाए रखने के लिए अनुसरण कर सकता है:

  1. खाद्य पदार्थों में विविधता बनाये रखें (सभी खाद्य समूहों से खाएं).
  2. एक आदर्श वजन बनाए रखें.
  3. किसी भी तरह की बहुत अधिक वसा से बचें.
  4. पर्याप्त स्टार्च और फाइबर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें.
  5. परिष्कृत चीनी का सेवन सीमित कर दें.

सन्दर्भ