निसेन फंडोप्लिकेशन

ग्रासनलीशोथ के लिए सर्जिकल उपचार

Peptic Stricture

पेप्टिक विधि

गहन चिकित्सा उपचार रिफ्लक्स रोग (गर्ड) और ग्रासनलीशोथ के अन्य रूपों के अधिकांश मामलों को ठीक कर देता है, लेकिन अक्सर दवा की समाप्ति के बाद एक साल के भीतर लक्षण फिर से लौट आते हैं. जब यह अवस्था पुरानी हो जाती है, तो एसिड दमन या समर्थक गतिशीलता एजेंटों को चिकित्सा में शामिल करना अनिश्चित काल के लिए आवश्यक हो सकता है. श्लैष्मिक क्षति या अन्य बदलाव लक्षणों पर नियंत्रण के बावजूद बने रह सकते हैं, और कुछ दवाओं के दीर्घकालिक प्रभाव अनिश्चित है. सर्जिकल उपचार एक आकर्षक विकल्प हो सकता है.

फंडोप्लिकेशन एक शल्य प्रक्रिया है जिसमें एसोफेजिअल स्फिंक्टर (LES) के कार्यों को बहाल करने के लिए पेट (आमाशय बुध्न) के ऊपरी भाग को (plicated) भोजन नली के निचले (अवर) हिस्से के चारों ओर लपेटा जाता है, LES आम तौर पर, चबाये गए भोजन (बोलस) को पेट में पारित करने की अनुमति देने के साथ गैस्ट्रिक सामग्री (काइम) को भोजन नली में ऊपर लौटने (रिफ्लक्स) से रोकने के लिए भी कार्य करता है. विभिन्न परिस्थितियों के कारण LES निगलने या रिफ्लक्स को रोकने के लिए अनुमति देने में विफल हो सकता है.

फंडोप्लिकेशन के तीन बुनियादी प्रकार हैं:

  • डोर(आंशिक एंटीरियर) फंडोप्लिकेशन, जिसमें बुध्न भोजन नली के शीर्ष पर रखा जाता है.
  • टूपे (आंशिक पोस्टीरियर) फंडोप्लिकेशन, जिसमें बुध्न भोजन नली के पीछे से लपेटा जाता है.
  • निसेन (पूर्ण) फंडोप्लिकेशन जिसमें बुध्न भोजन नली के सामने से चारों ओर लपेटा जाता है.

दो आंशिक फंडोप्लिकेशनों को एक्लेसिया नामक बीमारी का इलाज करने के लिए प्रयोग किया जाता है, जिसमें भोजन नली की मांसपेशियां चबाये गए भोजन को पेट (peristalsis) में नीचे स्थानांतरित नहीं कर पातीं और LES निगलने के बाद ठीक से आराम करने में विफल रहता है (deglutition).

बहरहाल, भले ही निगलने और क्रमिक वृत्तों में सिकुड़ने वाले कार्य अन्यथा सामान्य हों, लेकिन अगर LES ठीक से सिकुड़कर रिफ्लक्स को रोकने में विफल रहता है, तो एक पूरे फंडोप्लिकेशन की सलाह दी जा सकती है.

गर्ड से पीड़ित बच्चों के लिए सर्जरी की आवश्यकता बहुत कम पड़ती है. वे आम तौर पर आहार में परिवर्तन और खिलाने की तकनीक या खाने की आदतों में समायोजन से ही ठीक हो जाते हैं, लेकिन जब सर्जरी की आवश्यकता हो, तो सबसे अधिक निसेन फंडोप्लिकेशन ही किया जाता है.

निसेन फंडोप्लिकेशन

निसेन (पूर्ण) फंडोप्लिकेशन गर्ड और हायटस हर्निया के इलाज के लिए प्रयोग की जाने वाली एक शल्य प्रक्रिया है. पैराएसोफेजिअल हायटस हर्निया के लिए, यह सामान्य रूप से प्राथमिक उपचार है, लेकिन गर्ड के लिए आम तौर पर किसी वैकल्पिक प्रक्रिया के नाकाम रहने के बाद इसका प्रयोग किया जाता है.

प्रक्रिया

निसेन फंडोप्लिकेशन

गर्ड के लिए सर्जरी का लक्ष्य बोलस के लिए बिना किसी बाधा के एंटी-रिफ्लक्स सिस्टम को फिर से स्थापित करना है.

एक निसेन प्रक्रिया के दौरान, पेट की बुध्न (भोजन नली की बाईं ओर और पेट के मुख्य भाग के ऊपर) भोजन नली के पिछले भाग के चारों ओर लपेट दी जाती है. बुध्न के भोजन नली के दाईं ओर के आसपास आते भाग को अब बाईं तरफ के शेष भाग के सामने वाले भाग के साथ सिल दिया जाता है. यह फंडोप्लिकेशन एक बटन लगी शर्ट के कॉलर जैसा दिखता है, जिसमें टांके बटन की तरह, बुध्न की लपेट कॉलर की तरह, और भोजन नली बटन लगे कॉलर के बीच से झांकती गर्दन की तरह दिखते हैं.

nissen fundoplicationएक निसेन फंडोप्लिकेशन आमतौर पर लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से किया जाता है, लेकिन साथ ही पारंपरिक ओपन सर्जरी द्वारा भी किया जाता है. गर्ड ठीक करने के लिए इस्तेमाल करते वक़्त, अक्सर इसके साथ पायलोरोमायोटोमी या पायलोरप्लास्टी द्वारा पायलोरिक स्टेनोसिस को भी ठीक किया जाता है, जो जठरनिर्गम का एक प्रकार का रोग है, जिसमें पेट खाली होने में देरी होने लगती है.

इस प्रक्रिया के प्रभाव से भोजन नली में एक एकतरफा कार्यात्मक वाल्व की फिर से स्थापना होती है, जो खाना पेट में पारित करने के लिए अनुमति देता है, और साथ ही भोजन सामग्री को वापस ऊपर भोजन नली में जाने से भी रोकता है, जिससे गर्ड से राहत मिलती है.

जटिलतायें

एक निसेन प्रक्रिया के बाद ये सब जटिलतायें पैदा हो सकती हैं:

  • गैस ब्लोट सिंड्रोम या डकार लेने में असमर्थता की वजह से पेट या छोटी आंत में गैस का संग्रह, रैप के टाइट होने की वजह से या हवा निगलने के कारण (aerophagia)
  • निगलने में परेशानी
  • डंपिंग सिंड्रोम, या तेजी से पेट खाली होना
  • अत्यधिक ज़ख्म बन जाना
  • एक्लेसिया (कभी-कभार)

जोखिम और रोग का निदान

लेप्रोस्कोपिक निसेन फंडोप्लिकेशन (LNF) और ओपन निसेन फंडोप्लिकेशन (ONF) के बीच तुलना की जाये, तो दोनों की जटिलताओं और विफलता दर में थोड़ी भिन्नता है, लेकिन दोनों ही मामलों में, पूर्व मौजूदा स्थितियों की उपस्थिति की वजह से दोबारा ऑपरेशन की दर थोड़ी बढ़ जाती है.

बढ़ी हुई फंडोप्लिकेशन विफलता दर के साथ बच्चों के उप समूह में शामिल हैं:

  • सांस की जीर्ण समस्याएँ
  • न्यूरोलॉजिकल क्षति
  • मरम्मत की गई भोजन नली की अविवरता (ईए)
  • एक साल से कम उम्र के शिशु

ONF की तुलना में LNF में अस्पताल में रहने और नियमित भोजन लेना शुरू करने का समय कम होता है. कुल मिलाकर, LNF लागत, परिणाम और तीव्र जटिलताओं के मामले में ONF से बेहतर है. ONF की तुलना में LNF के लिए दोबारा ऑपरेशन की दर कुछ ज्यादा अवश्य है, लेकिन यह दर दोनों प्रक्रियाओं के लिए ही काफी कम है और दोनों को ही सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है.

करीब से देखने पर

हायटल हर्निया

निसेन फंडोप्लिकेशन

पैराएसोफेजिअल हायटल हर्निया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें समर्थन ऊतक के कमजोर होने के कारण पेट का एक हिस्सा छाती में ऊपर की ओर बढ़कर डायाफ्राम में घुस जाता है.

हायटल हर्निया के लक्षणों में इन्हें शामिल कर सकते हैं:

  • सीने में जलन, खासकर झुकते या लेटते वक़्त
  • निगलने में कठिनाई (dysphagia)
  • छाती में दर्द
  • डकारें

पेट की सामग्री या हवा के रिफ्लक्स के कारण दर्द और परेशानी होती है; हायटल हर्निया ही रिफ्लक्स का अकेला संभावित कारण नहीं है, लेकिन हायटल हर्निया की उपस्थिति में रिफ्लक्स और अधिक आसानी से होता है. हायटल हर्निया का निदान और पुष्टि ऊपरी GI श्रृंखला, बेरियम निगलने की जांच या एसोफेजो-गैस्ट्रो-डुएडेनोस्कोपी (EGD) द्वारा की जा सकती है.

कारण और सहायक कारकों में इन्हें शामिल कर सकते हैं:

  • मोटापा
  • लगातार खाँसी
  • कब्ज के कारण जोर लगाना
  • तनाव
  • निचले एसोफेजिअल स्फिंक्टर (LES) और समर्थन ऊतकों की जन्मजात कमजोरी

यह स्थिति बच्चों में आमतौर पर जन्म (जन्मजात) से ही होती है, और अक्सर शिशुओं में इसे गर्ड के साथ जोड़ा जाता है. निसेन फंडोप्लिकेशन को इस हालत को दूर करने के लिए सामान्यतः लैप्रोस्कोपी द्वारा प्रयोग किया जाता है और कम जटिलता दर के साथ यह त्वरित नतीजे देती है.

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी

इस सर्जरी का निर्णायक तत्व एक लेप्रोस्कोप, एक दूरबीन रॉड और एक वीडियो कैमरे या अन्य देखने वाले उपकरण से जुड़ी लेंस प्रणाली का इस्तेमाल होता है. एक फाइबर ऑप्टिक केबल प्रणाली शल्य-क्रिया क्षेत्र को एक ठन्डे प्रकाश स्रोत (हैलोजन या ज़ीनॉन) से रोशनी प्रदान करने का कार्य करती है.

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी को न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी, बैंड ऐड सर्जरी, ताली के छेद जितनी सर्जरी या पिनहोल सर्जरी के नामों से भी जाना जाता है.

एक पारंपरिक ओपन सर्जरी बनाम लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के लाभ में शामिल हैं:

  • कम खून बहना
  • छोटे चीरे, कम जख्म, कम दर्द और स्वास्थ्य लाभ में लगने वाला कम समय
  • प्रक्रिया का समय कुछ ज्यादा, लेकिन अस्पताल में रहने का समय बहुत कम
  • संक्रमण का कम जोखिम

लेप्रोस्कोपिक निसेन फंडोप्लिकेशन सर्जरी के वीडियो देखें.

जठर निर्गम संकुचन (पायलोरिक स्टेनोसिस)

शिशु अतिवृद्धि जठरनिर्गम संकुचन, या गैस्ट्रिक निकास बाधा, जठरनिर्गम कोटर के आसपास की मांसपेशियों की ऐंठन और अतिवृद्धि के कारण, पेट से आंतों के मुहाने का एक प्रकार का संकुचन है. इस हालत का सबसे बड़ा सबूत जीवन के पहले कुछ महीनों में गंभीर उल्टी होना है.

जठरनिर्गम के लक्षण आम तौर पर उम्र के तीसरे सप्ताह में शुरू होते हैं और उनमें इन्हें शामिल कर सकते हैं:

  • उल्टी, लगातार या प्रक्षेपी, विशेष रूप से खिलाने के बाद
  • कब्ज या बहुत कम मल-त्याग
  • निर्जलीकरण, कई घंटे तक डायपर गीला न होना, त्वचा पर झुर्रियां होना या त्वचा लिजलिजी हो जाना, सिर पर नरम गड्ढे और पीलिया
  • पनपने में विफलता और सुस्ती

निदान के लिए एक विश्वसनीय और लगातार इतिहास और उल्टी के विवरण से इसका निदान आसानी से किया जा सकता है. एक बाहरी शारीरिक परीक्षा में एक जठरनिर्गम पिंड – पेट में एक सख्त, हिलने-डुलने वाली गांठ (एक जैतून की तरह) – का पता चल सकता है. अल्ट्रासाउंड के द्वारा एक बढ़ा हुआ, मोटा जठरनिर्गम देखा जा सकता है. बेरियम निगलने के एक्स-रे द्वारा किसी भी संकुचन या रुकावट का पता चल सकता है. रक्त परीक्षण द्वारा निर्जलीकरण से उत्पन्न इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन प्रकट होगा, जिसे तुरंत सही किया जाना चाहिए.

जठरनिर्गम को आम तौर पर पायलोरोमायोटोमी सर्जरी द्वारा ठीक किया जाता है, जिसमें जठर निर्गम की मोटी हो गयी मांसपेशियों के बीच से काटते हुए रुकावट को दूर किया जाता है. यह आमतौर पर लैप्रोस्कोपी से किया जाता है.

सफल सर्जरी के बाद ज्यादातर शिशु अपेक्षाकृत काफी जल्दी सामान्य भोजन लेने लगते हैं. शल्य-क्रिया की जगह पर सूजन होने के कारण एक-आध दिन के लिए उल्टी हो सकती है. अगर कोई कठिनाई नहीं हो रही हो, तो अधिकांश शिशुओं को नियमित रूप से खाना खिलाना शुरू करके 48 घंटे के भीतर घर भेजा जा सकता है. अगर सर्जरी के कई सप्ताह बाद लक्षण दोबारा दिखाई देते हैं, तो इसका अर्थ है, कि या तो यह गर्ड या गैसट्राईटिस जैसी कोई अन्य संबंधित समस्या है, या फिर शल्य-क्रिया में कोई कमी रह गई है.

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उद्धरण

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