आहार विकार

मेरा बच्चा खाना क्यों नहीं चाहता?

हम जितना समझते हैं, वास्तव में यह समस्या उससे कहीं ज्यादा गंभीर है. बच्चों की कुल संख्या में से करीब 25% को खाने से सम्बंधित कोई-न-कोई समस्या होती है. बच्चा वास्तव में किसी आहार-विकार से ग्रस्त है या नहीं, यह निर्धारित करने के लिए यह समझना ज़रूरी है कि समस्या किस हद तक बच्चे के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है.

आहार-संबंधी मामलों के बच्चों की संख्या

Pediatric NG tube feedingबच्चों की ऐसी कोई एकल आबादी नहीं है जिसे आहार संबंधी समस्याओं वाले बच्चों के रूप में  वर्गीकृत किया जा सके. बाल आहार-विकार अलग-अलग उम्र और पृष्ठभूमि के कई बच्चों को प्रभावित करते हैं.

आहार-विकारों से पीड़ित कुछ बच्चे समय से पहले पैदा हुए होते हैं या आत्मकेंद्रित स्पेक्ट्रम पर  होते हैं, जबकि कई अन्य को एमआर, सिस्टिक फाइब्रोसिस, सेरेब्रल पाल्सी (सीपी) या डाउन सिंड्रोम होता है.

कईयों को गंभीर बीमारियों से जूझना पड़ा या अभी भी जूझ रहे हैं, जबकि कुछ अन्य मामलों में, कोई चिकित्सा संबंधी कारण ढूंढें नहीं जा सके. कुछ बच्चों के चिकित्सा मुद्दों का तो समाधान हो गया, लेकिन वे अभी भी ठीक से नहीं खा पाते.

समय-पूर्व प्रसव

ऐसे बच्चे भी काफी बड़ी संख्या में हैं, जिनका जन्म समय से पूर्व ही हो गया और जो आहार-संबंधी समस्याओं से ग्रस्त हैं. समय-पूर्व प्रसव और उससे जुड़ी जटिलतायें बच्चों में आहार समस्यायें पैदा होने के कई कारणों में से एक हो सकती हैं.

कुछ समय से पहले जन्मे बच्चों को जन्म के बाद नली अवश्य लगाई जानी चाहिए. अक्सर ऐसे बच्चे नली की अवधि पूरी होने के बाद फार्मूला या मां के दूध से इंकार करते हैं. नली लगाना निगलने में परेशानी के साथ बच्चे के लिए बेचैनी का कारण बन सकता है. यहां तक कि जब नली से उत्पन्न दर्द होना बंद हो जाता है, उसके बाद भी बच्चे खाने से इनकार या उल्टी व नली लगे होने के दौरान पैदा हुए अन्य व्यवहार प्रदर्शित कर सकते हैं.

असमय प्रसव के कारण अन्य कई जटिलताएं भी हो सकती हैं,(जैसे हृदय की असमान्यताएं, चूस पाने की क्षमता में कमी और अन्य शारीरिक असामान्यताएं जिनमें चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता है) जो आहार समस्याओं से संबंधित हैं.

चिकित्सा-संबंधी ज़रुरत


why is child not eating?कुछ बच्चों को चिकित्सा मुद्दों के कारण एक गैस्ट्रिक नली (G नली) या नैसोगैस्ट्रिक नली  (
NG नली) लगाई जाती है. यह आवश्यक हो सकता है, क्योंकि कई केसों में बच्चा या तो मुंह से खाने के लिए सुरक्षित नहीं होता या दिल की हालत, असमय जन्म, शल्य चिकित्सा या अन्य चिकित्सा मुद्दों की वजह से कमजोर हो सकता है. इन मुद्दों में से कुछ अपरिहार्य हैं और आहार नली को लगाने के बाद भोजन सम्बन्धी समस्याएँ पैदा हो सकती हैं या पहले से बढ़ सकती हैं. एक बार चिकित्सा मुद्दों का समाधान हो जाये और चिकित्सक बच्चे को मुंह से खाने के लिए मंजूरी दे दे, तो आम तौर पर आहार-चिकित्सा शुरू की जा सकती है.

कई उदाहरणों में, रिफ्लक्स आहार मुद्दों के लिए जिम्मेदार होता है. रिफ्लक्स तब होता है, जब खाद्य या पेय पेट में पहुँचता है, और फिर पेट की सामग्री में से कुछ हिस्सा वापस भोजन-नली  तक यात्रा करता है. यह शिशु या बच्चे के लिए दर्द का कारण हो सकता है और अंत में बच्चे के खाने के लिए मना करने का कारण भी बन सकता है. कभी कभी रिफ्लक्स और दर्द समाप्त हो जाने के बाद भी बच्चे का भोजन के लिए इनकार जारी रहता है.

रिफ्लक्स के ज्यादातर मामलों में चिकित्सक की मंजूरी के साथ आहार चिकित्सा शुरू कर सकते हैं.

निगलने में समस्याएं / डिस्फेजिया

निगलने में समस्या होने से भी आहार-संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. निगलने की समस्याओं में चबाने या चूसने में परेशानी, या निगलना शुरू करने में, या निगलते वक़्त भोजन या पेय-पदार्थों के फेफड़ों में प्रवेश जैसी परेशानियों को शामिल कर सकते हैं. (एस्पिरेशन)

निगलने की समस्याओं के कुछ प्रभाव हो सकते हैं – भोजन कराने में ज्यादा समय लगना, पर्याप्त भोजन न खा पाना, अपर्याप्त पोषण, वजन घटना, वजन की वृद्धि दर में कमी और एस्पिरेशन के मामले में बार-बार होने वाला निमोनिया और फेफड़ों का संक्रमण.

अज्ञात कारणों से पैदा हुई आहार-समस्याएं

ऐसे बच्चे भी बहुत बड़ी संख्या में हैं, जिन्हें कोई बीमारी न होते हुए भी आहार-सम्बन्धी समस्याओं से जूझना पड़ा. इन बच्चों की सभी आवश्यक जांचें करवाई जाती हैं, ताकि किसी शारीरिक असामान्यता या बीमारी का पता लगाया जा सके, जिसकी वजह से वे खाने से इनकार करते हों.

इन जांचों में एलर्जी की जांच, बेरियम निगलने की जांच, एंडोस्कोपी, पेट खाली होने की जांच व ऊपरी पेट और आँतों की जांच शामिल हो सकते हैं.

मेडिकल परीक्षण

बेरियम निगलने की जांच (ऊपरी पेट और आंतें)

ऊपरी पेट और आँतों की जांच में, बच्चा बेरियम के साथ एक चॉक जैसा तरल पीता है, जो एक एक्स-रे पर दिखाई देता है. जब बच्चा इसे पीता है, तो एक्स-रे या वीडियो प्रतिदीप्तिदर्शन / बेरियम निगलने की जांच (तरल का वीडियो एक्स-रे जब वह ऊपरी पेट और आंत से होकर गुजरता है) लिया जाता है. यह एक्स-रे उन स्थानों को दिखाता है, जिसमें भोजन नली के नष्ट हुए हिस्से के ऊतक ज़ख़्मी हो जाते हैं और भोजन को आगे भेजने के लिए एक संकीर्ण मार्ग बना देते हैं. यह एक्स-रे ऊपरी पाचन तंत्र, घेघा, पेट और ग्रहणी की विकृतियाँ भी दिखा सकता  है.

वीडियो प्रतिदीप्तिदर्शन बच्चे को बेरियम वाला तरल पीते हुए भी दिखाता है और उस तरल को उल्टा भोजन नली में या फेफड़ों में चढ़ते हुए भी दिखा सकता है. फिर बच्चे को अलग-अलग  गाढ़ेपन वाले तरल पिलाकर गाढ़ेपन का एक सुरक्षित स्तर ढूँढा जाता है, जो भोजन के दौरान एस्पिरेशन को कम करने या खत्म करने में सहायक हो सके. उम्र के साथ-साथ यह निश्चित करने के लिए, कि एस्पिरेशन अभी भी हो रहा है या नहीं, निगलने की जांच को फिर से दोहराया जा सकता है.

ऊपरी पेट और आँतों की एंडोस्कोपी

एक रोशन, लचीला एंडोस्कोप एक कैमरे के साथ एक धागे के सहारे भोजन नली, पेट और ग्रहणी तक उतरा जाता है. एक वीडियो स्क्रीन को ये वीडियो छवियाँ प्रेषित की जाती हैं, ताकि डॉक्टर आँतों के अन्दर की जांच कर सकें और रिफ्लक्स या जठर-शोध या अन्य शारीरिक असामान्यताओं से होने वाले नुकसान की पहचान करने में सक्षम हो सकें. भोजन नली, पेट, और ऊपरी छोटी आंत की बायोप्सी भी एंडोस्कोप के माध्यम से की जा सकती है और खाद्य एलर्जी, सीलिएक और इयोसोनोफिलिक विकारों को दूर करने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है.

पेट के निचले हिस्से की जांच / कोलोनोस्कोपी

पेट के निचले हिस्से की जांच या बेरियम एनीमा के लिए, रोगी को प्रक्रिया से पहले 1-3 दिनों तक ठोस खाद्य पदार्थ खाने के लिए नहीं दिए जाते और एक रेचक बृहदान्त्र से सभी ठोस सामग्री हटाने के लिए दिया जाता है. प्रक्रिया के दिन एक चिकनी नली को गुदा में डाला जाता है और बड़ी आंत को एक बेरियम युक्त तरल से भर दिया जाता है, जो एक एक्स-रे पर दिखाई देता है. एक्स-रे चित्रों और / या वीडियो का प्रयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है, कि कोई संरचनात्मक असामान्यताएं, आंत्रशोथ या क्रोन(CROHN) जैसे रोगों के लक्षण, या छोटी आंत में अवरोध तो नहीं हैं.

24 घंटे की पीएच जांच

यह रिफ्लक्स के लिए एक विश्वसनीय परीक्षण है. एक पतली नली नाक के माध्यम से अन्दर डाली जाती है और उसे भोजन नली में रखा जाता है, जहां पेट और भोजन नली मिलते हैं. अगले 24 घंटे के दौरान यह नली एसिड का स्तर नापती है. अगर एसिड का स्तर लगातार ऊंचा रहता है, तो इसका अर्थ है कि रिफ्लक्स हो रहा है. इसके अलावा, यह परीक्षण यह भी दिखाता है कि जब बच्चा रोता, खांसता या रिफ्लक्स के अन्य लक्षण दिखाता है, क्या तब भी उसके शरीर में एसिड का स्तर ऊंचा होता है.

पेट खाली होने की जांच (दूध स्कैन)

पेट खाली होने की जांच जैसे दूध स्कैन या गैस्ट्रो ईसोफेगल सिन्टीग्राफी से इस बात का निर्धारण होता है कि पेट खाली होने में कितना समय लग रहा है. बच्चे को एक रेडियम लेबल पाउडर मिश्रित दूध या अन्य खाद्य या पेय निगलने के लिए दिया जाता है, पाचन तंत्र के माध्यम से जिसका निरीक्षण किया जा सकता है. यह परीक्षण भोजन नली (रिफ्लक्स की जांच के लिए), फेफड़ों (एस्पिरेशन कीजाँच के लिए) और पेट (धीमी गति से खाली पेट की जाँच करने के लिए) पर केंद्रित होता है.

क्योंकि यह परीक्षण पेट में खाद्य या पेय कितने समय तक रहता है, इसकी जांच करता है, अतः यह जठरांत्र गतिशीलता के मुद्दों के लिए एक प्रभावी परीक्षण है. यह परीक्षण पीएच जांच की तुलना में रिफ्लक्स का पता लगाने में और अधिक सटीक हो सकता है, क्योंकि यह सामान्य भोजन से ज्यादा मिलता-जुलता है और पूरे पाचन तंत्र के माध्यम से पाचन प्रक्रिया की जांच करता है. संरचनात्मक विषमता का पता लगाने में यह एंडोस्कोपी या बेरियम जांच से कम प्रभावी है.

इसोफेजियल मैनोमेट्री / एंट्रोडुओडोनल गतिशीलता अध्ययन

इसोफेजियल मैनोमेट्री में एक पतली नली को नाक के माध्यम से भोजन नली में डाला जाता है. यह नली निगलते समय भोजन नली के संकुचन और फैलाव का परीक्षण करने के लिए उस के निचले हिस्से में दबाव को नापती है.

इसोफेजियल मैनोमेट्री की ही तरह एंट्रोडुओडोनल गतिशीलता अध्ययन में, एक पतली नली नाक और भोजन नली के माध्यम से और पेट और ग्रहणी (छोटी आंत की शुरुआत) में डाली जाती है. यह नली मांसपेशियों की ताकत का परीक्षण करने के लिए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे पेट के माध्यम से ग्रहणी तक खाद्य भेज रहे हैं या नहीं, पेट और ग्रहणी में दबाव की जांच करती है. यह परीक्षण बच्चों में गतिशीलता के कारणों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

एलर्जी का परीक्षण

चुभन टेस्ट

संदिग्ध एलर्जी वाले पदार्थ की एक छोटी राशि या एलर्जी की एक बैटरी को विशेष रूप से लेबल लगाये गए स्थानों में त्वचा के नीचे डाला जाता है. अगर उस खास पदार्थ से एलर्जी होगी, तो वहां एक पित्ती या लाली और सूजन बन जाएगी और इसलिए इम्यूनोग्लोब्युलिन जी (आईजीजी) के लिए तुरंत सकारात्मक या नकारात्मक परिणाम प्राप्त किया जा सकता है.

पैच टेस्ट

संदिग्ध पदार्थ को त्वचा पर लगाया जाता है और एक पैच से उस जगह पर चिपका दिया जाता है. एक जीवाणुरहित पैच एक अन्य स्थान पर लगाया जाता है. यदि संदिग्ध पैच के तहत पित्ती बन जाती है, लेकिन नियंत्रण पैच के नीचे नहीं बनती है, तो परीक्षण सकारात्मक है.

एक त्वचा परीक्षण यह भविष्यवाणी नहीं कर सकता कि एक एलर्जी से युक्त खाद्य लेने पर क्या प्रतिक्रिया हो सकती है, लेकिन यह रोगी के विशेष खाद्य पदार्थों के लिए प्रतिक्रियाओं के  इतिहास द्वारा एलर्जी होने की पुष्टि कर सकता है.

रक्त परीक्षण

रक्त परीक्षण, सबसे अधिक रेडियोएलर्जोसोर्बेंट टेस्ट (RAST), खून में आईजीजी एंटीबाडीज की वास्तविक राशि को माप सकता है, जिसकी कुछ खाद्य पदार्थों की भावी राशि से तुलना की जाती है. रक्त परीक्षण में एक ही नमूने से एलर्जी के सैकड़ों कारणों की जांच की जा सकती है और ये इन्हेलेंट्स के साथ खाद्य एलर्जी कारकों को भी कवर करते हैं. हालांकि, गैर आईजीजी मध्यस्थता एलर्जी का इस पद्धति से पता नहीं लगाया जा सकता. आईजीजी के लिए रक्त परीक्षण के महत्व के बारे में कुछ विवाद है, जो देरी से शुरु होने वाली खाद्य एलर्जी (वायरस, बैक्टीरिया और कवक के साथ जुड़े) के विपरीत आमतौर पर तेजी से शुरू होने वाली आईजीजी एलर्जी की ओर इशारा कर सकता है.

त्वचा परीक्षण रक्त परीक्षण की तुलना में अधिक तेज और संवेदनशील हो सकता है, तकनीक पर निर्भर करते हुए, लेकिन रक्त परीक्षण के कुछ खास दवाओं या पहले से मौजूद दानों से प्रभावित होने की संभावना त्वचा परीक्षण से कम होती है. जिन केसों में मरीज़ संदिग्ध एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थ के गंभीर दुष्प्रभावों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं, वहां रक्त परीक्षण को प्राथमिकता दी जाती है.

खाद्य चैलेंज टेस्ट

खाद्य चुनौती परीक्षण, आदर्श रूप से डबल ब्लाइंड प्लेसीबो नियंत्रित परीक्षण, बारीकी से नजर रखते हुए कड़ी निगरानी में किये जाते हैं, ताकि अन्य कारकों जैसे इस तरह के भोजन तैयार करने की तकनीक या भोजन की पहचान के लिए मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रियाओं को समाप्त किया जा सके.

उन्मूलन आहार

एक उन्मूलन आहार एक बच्चे के आहार से विशिष्ट संदिग्ध खाद्य पदार्थ या सामग्री को स्वेच्छा से हटा देने की प्रक्रिया है. यदि कुछ समय के बाद ये लक्षण समाप्त हो जाते हैं, तो बाल रोग विशेषज्ञ या एलर्जी विशेषज्ञ उन खाद्य पदार्थों को एक-एक करके खाने में फिर से शामिल कर सकते हैं. यदि लक्षण वापस आ जाते हैं, तो एक विशिष्ट निदान से आमतौर पर इस बात की पुष्टि की जा सकती है. दोषी तत्वों की मात्रा को सीमित करने के लिए इसे दोहराया भी जा सकता है. एक आहार विशेषज्ञ एलर्जी वाले भोजनों के पोषक तत्वों की अनुपस्थिति की क्षतिपूर्ति करने के लिए संभावित योजना बनाकर मेनू बनाने में सहायता कर सकते हैं.

यदि एनाफाईलैक्टिक या अन्य गंभीर प्रतिक्रियायें भी हो रही हों, तो उन्मूलन आहार और खाद्य चुनौती परीक्षण नहीं किया जा सकता.