आहार विकार

मिथ्या धारणाएं

1. बच्चे को जब भूख लगेगी, वह खुद खा लेगा.

बच्चे का ठीक से खाना नहीं खाना एक माता पिता के लिए बेहद तनावपूर्ण होता है, क्योंकि उनका प्राथमिक काम अपने बच्चों की भलाई सुनिश्चित करना है. आहार विकारों वाले कई बच्चे इस हद तक भूखे रह सकते हैं कि उनका स्वास्थ्य ही खतरे में पड़ जाए.

अधिकाँश पेशेवर चिकित्सक इन मुद्दों को समझ नहीं पाते, क्योंकि यह एक आम धारणा है कि बच्चे को कभी-न कभी तो भूख लगेगी ही और तब वह अपने आप खाना खा लेगा. कभी कभी, माता-पिता को सेवन के बारे में चिंता नहीं करने की सलाह दी जाती है ताकि परिस्थितियां अपना हल स्वयं ढूंढ लें. लेकिन कोई भी माता पिता सिर्फ यह देखने के लिए कि क्या होता है, अपने बच्चे को ऐसी स्थिति में नहीं छोड़ सकते.

चिकित्सा पेशेवरों द्वारा स्थिति को ठीक से न समझ पाना चरम हताशा पैदा कर सकता है, क्योंकि उसके बिना समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता.

2. बच्चे को जब भूख लगेगी, वह आपको बता देगा.

आहार विकारों से ग्रस्त अनेकों बच्चे भूख के कोई संकेत नहीं दिखाते; वे भोजन नहीं मांगते और न ही उसके लिए कभी रोते हैं. यह माता-पिता के लिए काफी असामान्य व असहज व्यवहार होता है.

बच्चे जो भूख के कोई संकेत नहीं दिखाते

baby not eatingबच्चों में विभिन्न प्रकार के खाने सम्बन्धी विकार हो सकते हैं. सबसे पहली समस्या है बच्चों का पर्याप्त मात्रा में न खाना या पीना. यह अन्य मुद्दों के साथ अत्यधिक वजन घटने और निर्जलीकरण का कारण हो सकता है.

इन बच्चों में से कई भूख के लक्षण दिखाने में विफल रहते हैं और यदि उन्हें मौका दिया जाये, तो वे लंबी अवधि तक बिना भोजन या पानी के रह सकते हैं.

अगर इनका सही इलाज न किया जाये, तो इन बच्चों के नाक (एक नैसो गैस्ट्रिक या NG-नली, जो गैर-स्थायी है) में या पेट (एक गैस्ट्रिक, या G नली, जो और अधिक स्थायी है) में आहार नली लगानी पड़ सकती है. आमतौर पर, वज़न में वृद्धि और हाइड्रेशन के लिए पर्याप्त पोषण देने के लिए तैयार फ़ॉर्मूला को इन नलियों के माध्यम से दिया जाता है.

चुनिंदा खाने वाले

कुछ बच्चे ऐसे होंगे, जो एक खास खाद्य-समूह की वस्तुएं ही खायेंगे, जैसे स्टार्च या फल आदि. कुछ केवल कुछ खास रंग के भोजन करेंगे. दूसरों को विशेष बनावट वाले खाद्य पदार्थ ही चाहियें.

चुनिंदा खाना छोटे बच्चों में आम है. आहार विकारों वाले बच्चे अपने भोजन से पूरे खाद्य समूहों को हटा सकते हैं या उनमें से दो-तीन चीज़ों को छोड़कर बाकी सभी खाद्य पदार्थ खाने बंद कर सकते हैं. कुछ केवल पानी पीना या मछली के पकौड़े ही खाना चाहते हैं. यह गंभीर कुपोषण या वजन घटने का कारण बन सकता है.

कभी कभी इन शिशुओं, बच्चों और किशोरों में पर्याप्त नहीं खाने और नकचढ़े होने का एक संयोजन होता है. कुछ शिशु केवल करारे बिस्किट या मुंह में आसानी से घुल जाने वाले अन्य मुलायम खाद्य पदार्थों की केवल एक छोटी राशि लेते हैं, या केवल थोडा पानी पीते हैं. पर्याप्त मात्रा में नहीं खाने के कारण उन्हें नकचढ़े बच्चे के रूप में वर्गीकृत करना मुश्किल होता है. एक बच्चे को उसके द्वारा लिए जा रहे भोजन की मात्रा, खाद्य पदार्थों के प्रकार, और खाने के दौरान प्रदर्शित इनकार व्यवहार द्वारा वर्गीकृत करना अधिक उपयोगी है.

पर्याप्त मात्रा में उचित पेय न पीना

कभी कभी, बच्चों को केवल पीने से संबंधित समस्यायें होती हैं. पीने के साथ ये समस्यायें  निर्जलीकरण या कुपोषण को जन्म दे सकती हैं.

कुछ बच्चों को केवल पानी पीना होता है. ये बच्चे भोजन की सार्थक मात्रा नहीं खा रहे हो सकते हैं. शिशुओं और बच्चों में यह कुपोषण का कारण बन सकता है, क्योंकि केवल पानी ही पीने के कारण फॉर्मूला आधारित पेय और / या स्तन के दूध से मिलने वाला पोषण और कैलोरीज़ नहीं मिल पाएंगी.

कुछ अन्य बच्चे भोजन तो सार्थक मात्रा में खा लेते हैं, लेकिन किसी भी तरल पदार्थ को पीने से इनकार करते हैं. यह आमतौर पर एडिप्सिया के रूप में जाना जाता है. इस विकार से निर्जलीकरण की समस्या हो सकती है.

नींद में दूध पिलाना / सोते हुए दूध पिलाना

कुछ बच्चे बोतल से पीने से इंकार करते हैं या केवल नींद में पीते हैं. वे जागते हुए कोई भी भोजन या पेय नहीं लेते.

भूख लगने पर ये रोते हैं और आहार देने के लिए इन्हें फिर से सुला दिया जाता है. सो जाने पर वे स्तनपान या बोतल से दूध पी लेते हैं.

माता-पिता के लिए अपने बच्चे को सुलाने और आहार की एक छोटी सी मात्रा देने में इतना समय खर्च करना बहुत ही परेशानी का कारण हो सकता है.

नींद में आहार लेना एक और अधिक महत्वपूर्ण समस्या बन जाता है, जब एक बच्चा 6-8 महीने की उम्र तक पहुँच जाता है. इस उम्र में कुछ कैलोरी ठोस खाने से लेने की जरूरत होती है. यह आदत कैलोरी की खपत और ठोस खाद्य पदार्थों से मिलने वाले आवश्यक पोषण को कम कर सकती है.

उल्टी और कंठ अवरुद्ध हो जाना

आहार मुद्दों वाले कई बच्चों को गला रुक जाने और उनके भोजन के बाहर उल्टी हो जाने की समस्या होती है, जिससे पेट में जाने वाले भोजन का स्तर बहुत कम हो जाता है.

इसके परिणामस्वरुप बच्चा खाने में नखरे या खाने से पूरी तरह इनकार कर सकता है.

यह आहार नली वाले बच्चों के बीच भी आम है. कई मामलों में, पर्यावरणीय कारणों को ठीक कर देने से उलटी भी ठीक हो जाती है.

उल्टी की रोकथाम न केवल पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसलिए भी है, क्योंकि पेट में ऊपर आने वाला अम्ल भोजन नली की परत को नुकसान पहुंचा सकता है.

भोजन और तरल को लगातार थूकना

baby-spits-out-foodयह तब होता है जब आप अपने बच्चे के मुंह में भोजन का ग्रास देते हैं और वह उसे थूक देता है. जब यह दिन भर के हर भोजन में लगातार होता रहता है, तो यह भोजन के समय को 1-3 घंटे तक लम्बा कर सकता है, जो कि एक दिन में कई बार चलता है.

ऐसी स्थिति किसी के लिए भी बेहद निराशाजनक हो सकती है. इसके अलावा बच्चे के भोजन की कुल मात्रा भी बहुत कम हो जाती है.

ठोस भोजन के लिए इनकार

कुछ बच्चों को केवल फ़ॉर्मूला चाहिए होता है. वे ठोस खाद्य पदार्थों को देखते ही रोना, चिल्लाना, चम्मच से मुंह फेर लेना, मुंह को कसकर बंद कर लेना आदि शुरू कर देते है. जैसा कि “नींद में दूध पिलाना / सोते हुए दूध पिलाना,” में उल्लेख किया गया है, एक निश्चित उम्र में बच्चों को जितनी कैलोरीज़ की जरूरत होती है, वे अकेले मां के दूध या फ़ॉर्मूला से नहीं मिल सकतीं.

कई गंभीर मामलों में, ऐसे बच्चे पानी की बड़ी मात्रा तो पी लेते हैं, लेकिन अन्य कोई चीज़ नहीं  खाते या पीते.

अक्षम खाने-पीने के बर्तनों या सीरिंज से खाने वाले बच्चे व शिशु

कुछ शिशु केवल सिरिंज से खाद्य या पेय लेते हैं, जो कि आवश्यक मात्रा में भोजन देने में लगने वाली लंबी अवधि के कारण अत्यंत अक्षम तरीका है.

बच्चे मोटी बनावट वाले भोजन या अपने आप खाना नहीं सीख पाते. एक सिरिंज से आहार देने के लिए, माता-पिता या देखभाल करने वाला बच्चे के मुंह में सिरिंज डाल देता है और उससे खाद्य या पेय को मुंह में छोड़ देता है. यह प्रक्रिया बच्चे को स्वतंत्र रूप से चूसना सीखने से रोकती है. इसके अलावा, मोटी बनावट वाले खाद्य एक सिरिंज के माध्यम से नहीं दिए जा सकते, क्योंकि वे सिरिंज को जाम कर देंगे.

ऐसे बच्चे अधिक उपयुक्त बर्तनों, जैसे चम्मच या कप, से खाना नहीं सीख पाते, क्योंकि उन्हें इसकी आदत नहीं डाली गई होती.

मौखिक संचालन मुद्दे

texture selectivityकई बच्चे ऐसे होते हैं, जो खाने को चबा नहीं सकते या चबाना नहीं चाहते या अपनी उम्र के अनुरूप वस्तुएं नहीं खाते. वे आमतौर पर केवल मसला हुआ और पिसा हुआ खाद्य पदार्थ ही खाते हैं. अगर उन्हें नियमित बनावट वाला भोजन दिया जाये, तो वे उसे थूक सकते हैं या पूरा-का-पूरा निगल सकते हैं, जो एक दमघोंटू खतरा हो सकता है.

सही बनावट के साथ भोजन उपलब्ध कराना इस बात को बेहद सीमित कर सकता है कि आप अपने परिवार के साथ कहाँ और क्या खा सकते हैं. कभी कभी, एक रेस्तरां में खाना या छुट्टी पर जाना बेहद मुश्किल हो सकता है. गंभीर आहार मुद्दों से निपटने के तनाव पूरे परिवार पर दबाव डाल सकते हैं.

बोतल निर्भरता

bottle dependencyकुछ शिशु या बच्चे खाना या पीना केवल एक बोतल से लेते हैं. आमतौर पर यह एक तरल रूप या गाढ़े रूप में भोजन सम्मिश्रण पर जोर देता है. कुछ बच्चे 7 साल की उम्र तक भी केवल एक बोतल से ही पोषण और कैलोरी लेते हैं. हालाँकि इसके परिणाम सिरिंज का उपयोग करने जितने गंभीर नहीं होते हैं, फिर भी यह अन्य बच्चों से अलगाव की भावना पैदा कर सकते हैं क्योंकि यह एक उम्र के अनुसार उचित भोजन का उपभोग करने का तरीका नहीं है. इसके अलावा, ये बच्चे मेज-बनावट खाद्य पदार्थों के लिए भी प्रगति नहीं करते हैं.

आहार की नली निर्भरता के निहितार्थ

feeding-tube-dependent-child इस बात के अनेक वास्तविक सबूत मौजूद हैं कि नली द्वारा आहार लेने वाले बच्चों के समग्र विकास में देरी होती है. वे बात करना, घुटनों के बल चलना, चलना, सामाजिक मेलजोल और अन्य प्रमुख विकास प्रदर्शित करने वाले कार्य धीमी गति से करते हैं.

बच्चों और शिशुओं में शारीरिक रूप से बदलाव भी हो सकते हैं, जैसे वृद्धि न होना, बालों का रंग बदल जाना और बाल पतले हो जाना और अस्वस्थ त्वचा के रंग में परिवर्तन होना. यह नली से आहार लेने के कई स्पष्ट कुप्रभावों में से एक है.

अन्य कुप्रभावों में मुंह से लिए जाने वाले भोजन में कमी, मुंह का चिपचिपा होना और कफ वृद्धि, नली के स्थान का रखरखाव, शल्य जटिलतायें, उल्टी में भारी वृद्धि, बीमारी के लिए संवेदनशीलता बढ़ जाना आदि शामिल हैं.

कल्पना कीजिये कि आप पूरे दिन केवल गेटोरेड और एन्स्योर नामक पेय पी रहे हैं. या फिर पूरे दिन भूखे हैं. आपको क्या लगता है कि आपको मानसिक या शारीरिक रूप से कैसा महसूस होगा? आपमें कितनी ऊर्जा होगी? आप कितना ध्यान केंद्रित कर पाएंगे? किसी दिए गए कार्य पर आप कैसा प्रदर्शन कर पाएंगे?

आहार नली की रोकथाम का महत्व

एक एनजी -नली या जी-नली का सहारा लेने से पहले यह अच्छी तरह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उसके अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है. (जब तक आपका बच्चा मुंह से खाने के लिए सुरक्षित नहीं है)

एक बिना एनजी नली या जी नली के बच्चे के साथ काम करना ज्यादा आसान होता है.

नली लगाने में कई मुद्दों पर अनुभाग “आहार नली निर्भरता के निहितार्थ’ में उल्लेख के अलावा, इसमें बच्चे को बेहोश करना और उसकी शल्य प्रक्रिया करना भी एक मुद्दा है.

कुछ आहार चिकित्सक / विशेषज्ञ आहार नली की सिफारिश करते हैं. जब तक बच्चा मुंह से खाने के लिए असुरक्षित नहीं है, यह अनैतिक है.

अगर आहार चिकित्सक बच्चे के साथ प्रगति नहीं कर सकते हैं, तो नली लगाना आवश्यक हो जाने से पहले ही उन्हें माता पिता को सूचित करना चाहिए.

आहार चिकित्सक को यह बताना चाहिए कि उनके पास उस आहार समस्या के लिए कोई हल नहीं है और आप किसी अन्य चिकित्सक, क्लिनिक या पद्धति को आज़मा सकते हैं. ऐसा कहने में कुछ भी गलत नहीं है कि “मैं नहीं जानता”. दूसरी ओर, यह एक बहुत बड़ी नैतिक समस्या है, जब एक आहार विशेषज्ञ को किसी विशेष आहार मुद्दे से निपटने का तरीका मालूम न हो, और वह इस बात को माता-पिता से छिपाकर रखता है.

जब आपके बच्चे को कोई आहार सम्बन्धी समस्या होती है, तो मानो समय आपके पक्ष में नहीं होता. हमेशा अपने क्लिनिक या आहार चिकित्सक / विशेषज्ञ से प्रचुरता में आहार सुनिश्चित करें.

खाद्य इनकार

उचित सेवन के लिए आवश्यक व्यवहार:

  1. पर्याप्त मात्रा में मुंह खोलना
  2. निगलना
  3. चबाना

एक बार जब बाधापूर्ण व्यवहार समाप्त हो जाते हैं और बच्चे को ज़रूरी व्यवहार में प्रशिक्षित कर दिया जाता है, तो सेवन की मात्रा बढ़ जाती है, विविधता बढ़ जाती है और भोजन के समय की अवधि भी कम होकर यथेष्ट हो जाती है.

परिणामस्वरूप बच्चा हो जाता है पहले से अधिक हृष्ट-पुष्ट और माता-पिता पहले से अधिक प्रसन्न और संतुष्ट.

खाद्य इनकार के कारण

अक्सर आहार विकारों के कारणों का पता लगाना मुश्किल होता है, जब तक ये कारण प्रकृति में चिकित्सकीय न हों. इसलिए कोई भी आहार चिकित्सा करने से लिए यह जरूरी हो जाता है कि चिकित्सा मुद्दों को पहले हल किया जाए. कई बार, चिकित्सा मुद्दों का समाधान हो जाने के बाद भी आहार समस्याएं समाप्त नहीं होतीं. इस बिंदु पर, आहार चिकित्सा की आवश्यकता होती है.

आहार विकारों से पैदा होने वाली समस्याएं

बच्चे के पर्याप्त मात्रा और विविधता में भोजन न करने से पैदा होने वाली कई समस्याओं में से पहली है वज़न में कमी. कम वजन विभिन्न स्वास्थ्य और विकास मुद्दों को जन्म दे सकता है.

कभी कभी, बच्चे का वजन बढ़ाने में मदद करने के लिए एक आहार नली लगाई जाती है. यह मुंह से नहीं खाने की समस्या को बढ़ा सकती है, लेकिन और कोई विकल्प नहीं होता, क्योंकि अंततः बच्चे का स्वास्थ्य दांव पर लगा होता है.

आहार मुद्दों के प्रकार:

  1. बोतल से इनकार
  2. भोजन से इनकार
  3. निद्रा आहार (केवल सोते हुए बोतल से पीना)
  4. केवल कुछ ही चीज़ें खाना
  5. बनावट के अनुसार ही चयन करना

प्रत्येक बच्चा औरों से अलग होता है और खाने के दौरान अलग-अलग व्यवहार दर्शाता है. उदाहरण के लिए, बोतल से इनकार करने वाला एक बच्चा सिर को दाएँ-बाएं हिला सकता है, जबकि एक अन्य बच्चा बार-बार रो कर या उलटी करके ऐसा कर सकता है. आहार मुद्दे को उचित तरीके से संबोधित करने वाले आहार मसौदे के निर्धारण के लिए यह पता लगाना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि कौन सा व्यवहार आपके बच्चे के सेवन को प्रभावित कर रहा है.

आहार मुद्दों के प्रकार:

  1. सिर घुमाना
  2. उल्टी
  3. रोना
  4. खाने के बारे में नकारात्मक बातें करना
  5. खाना बाहर थूकना
  6. खाने को निगले बिना देर तक मुंह में रखना
  7. तरल को निगले बिना देर तक मुंह में रखना
  8. एक ऊंची कुर्सी या मेज पर बैठने के लिए इनकार करना

अक्सर, बच्चों का जो विशिष्ट व्यवहार होना चाहिए, वह होता नहीं. कुशल तरीके से उचित सेवन की मात्रा हासिल की जा रही है, यह सुनिश्चित करने के लिए खाने के ये व्यवहार सिखाये जाने की जरूरत होती है.