रिफ्लक्स

रिफ्लक्स

आहार-संबंधी समस्याओं वाले कई बच्चों को रिफ्लक्स भी हो सकता है. इस पृष्ठ पर बताया गया है कि रिफ्लक्स क्या है और इसका निदान और उपचार कैसे किया जा सकता है.

रिफ्लक्स क्या है?

पाचन तंत्र

पाचन तंत्र

रिफ्लक्स, या गैस्ट्रो एसोफ़ेजिअल रिफ्लक्स (जीईआर) तब होता है, जब पेट की सामग्री निचले एसोफ़ेजिअल स्फिंक्टर (लेस) के माध्यम से भोजन नली में से वापस गुजरती है.

इस ऊर्ध्वगामी तरल में, भोजन, एसिड और प्रोटीन को पचाने में मदद करने वाले और पित्त वाले एंजाइम हो सकते हैं. ऊर्ध्वगामी तरल का सबसे हानिकारक घटक पेट का एसिड होता है, जो भोजन नली  को नुकसान पहुंचा सकता है. बच्चों की कुल आबादी का कम-से-कम एक तिहाई कभी-न-कभी रिफ्लक्स का सामना अवश्य करता है, लेकिन लगभग सभी एक वर्ष के भीतर इससे छुटकारा पाने में सफल हो जाते हैं.

 

गैस्ट्रो एसोफ़ेजिअल रिफ्लक्स रोग क्या है?

एस्पिरेशन तब होता है जब खाद्य भोजन नली के बजाय हलक में चला जाता है.

एस्पिरेशन तब होता है जब खाद्य भोजन नली के बजाय हलक में चला जाता है.

गैस्ट्रो एसोफ़ेजिअल रिफ्लक्स रोग (गर्ड) रिफ्लक्स का एक और अधिक गंभीर रूप है. गर्ड होने पर, ऊर्ध्वगामी तरल पदार्थ पूरी तरह से भोजन नली में ऊपर और मुँह से बाहर आ सकते हैं,(उल्टी या थूकना), साइनस में जा सकते हैं या फिर फेफड़ों (एस्पिरेशन) में भी आ सकते हैं.

गर्ड के साथ, रिफ्लक्स अधिक बार होता है और जीईआर के मुकाबले दर्द भी अधिक हो सकता है.

पेट के एसिड के बार-बार भोजन नली में जाने से वह लाल होकर छिल सकती है, (ग्रासनलीशोथ) और गंभीर मामलों में, रक्त-स्राव या ज़ख्म पैदा कर सकती है, जिससे भोजन निगलना दर्दनाक और मुश्किल हो सकता है. बार-बार उल्टी दांतों के इनैमल को भी नुकसान पहुंचा सकती है.

बच्चों में रिफ्लक्स का दर्द अक्सर भोजन से इनकार, उचित पोषण की कमी, वजन न बढ़ने, वजन घटने या पनपने में असफल रहने की वजह बन जाता है और परिणामस्वरूप गंभीर मामलों में आहार देने के लिए जी नली या एनजी नली लगाने की ज़रुरत पड़ती है.

रिफ्लक्स का एक और बहुत गंभीर परिणाम होता है – यदि ऊर्ध्वगामी तरल फेफड़ों में प्रवेश कर जाता है, तो यह संभवतः सांस लेने में तकलीफ या निमोनिया का कारण बन सकता है. यदि ऊर्ध्वगामी तरल साइनस में प्रवेश कर जाये, तो यह साइनस संक्रमण और गले में सूजन पैदा कर सकता है. रिफ्लक्स वाले बच्चों में दम घुटने या नींद न आने की समस्या हो सकती है.

बच्चों में रिफ्लक्स के लक्षण

ऊर्ध्वगामी तरल पदार्थ भोजन नली में प्रवेश करते हैं, एसिड भोजन नली को नुकसान पहुंचाता  है और इसके कारण कुछ भी निगलते वक़्त असहनीय दर्द के कारण बच्चा रोता है और उसे चुप कराना मुश्किल हो जाता है. भोजन नली में बार-बार ज़ख्म होने से भोजन नली में संकुचन और सख्ती आ सकती है, जो वहां भोजन के फंस जाने का कारण बन सकता है.

एसिड जब गले में ऊपर आता है, तो गला कर्कश बन सकता है और इससे कंठशोथ हो सकता है. इससे बच्चे को बार-बार थूकना पड़ सकता है, भोजन के बाद भी वे अक्सर थूकते रह सकते हैं और यह प्रवृत्ति बड़े हो जाने पर भी जारी रह सकती है.

क्योंकि इससे खाना कष्टदायक बन जाता है, अतः बच्चे भोजन से इंकार या एक भोजन के दौरान कुछ ही ग्रास लेकर उसे छोड़ सकते हैं. कुछ अन्य बच्चों को हर भोजन में उल्टी हो सकती है. पर्याप्त नहीं खा पाने के कारण रिफ्लक्स से पीड़ित बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता और उनका वज़न बढ़ना बंद हो सकता है या वजन कम हो सकता है. कुछ मामलों में, समय की एक लंबी अवधि के लिए बच्चे का वज़न बढ़ना बंद हो जाता है या इतना वजन कम हो जाता है कि वे अपनी उम्र के लिए विकास की औसत श्रेणी से नीचे गिर जाते हैं और चिकित्सक द्वारा पनपने में असफल घोषित किये जा सकते हैं.

रिफ्लक्स सबसे ज्यादा लेटते वक़्त होता है, इसलिए बच्चे को सोने में समस्या हो सकती है, वह अक्सर जाग सकता है या भोजन के बाद पालने या ऐसी ही किसी सपाट सतह पर लिटाने पर रोने लग सकता है. यदि ऊर्ध्वगामी तरल पदार्थ नींद के दौरान हवा के प्रवाह को रोक दें तो नींद न आने की समस्या हो सकती है .

कुछ मामलों में, ऊर्ध्वगामी तरल पदार्थ भोजन नली के माध्यम से फेफड़ों में चला जाता है, जिसे एस्पिरेशन कहते हैं. अगर एस्पिरेशन होती है, तो फेफड़ों में गए ऊर्ध्वगामी तरल पदार्थ संक्रमण, खाँसी, घरघराहट, आवर्तक निमोनिया, साइनस संक्रमण और अस्थमा का कारण बन सकते हैं.

रिफ्लक्स के कारण

रिफ्लक्स का मुख्य कारण निचले एसोफ़ेजिअल स्फिंक्टर (लेस) की एक खराबी है. आम तौर पर, लेस निगलने के दौरान खुलता है और उसके बाद खाद्य सामग्री को पेट में रखने के लिए बंद हो जाता है. जबकि रिफ्लक्स होने पर, लेस निगलने से संबंधित न रहकर कभी भी खुल जाता है और कितनी भी देर तक खुला रह सकता है, जिससे पेट की सामग्री भोजन नली में चली जाती है. कुछ अन्य मामलों में, भोजन नली के संकुचन, जो आम तौर पर मुंह से पेट तक जाते हैं, अनिश्चित हो जाते हैं – यानि खाना पेट में पहुँचने से पहले ही ये रुक जाते हैं या निगलने के साथ नहीं होते हैं.

यदि लेस कमजोर है और पूरी तरह से बंद नहीं होता है, तब भी रिफ्लक्स हो सकता है. अन्य मामलों में, रिफ्लक्स उत्पन्न हो सकता है, क्योंकि पेट धीरे-धीरे खाली होता है, और लेस पर अधिक दबाव पड़ने लगता है, जो भोजन नली के संकुचन को मजबूत बना सकता है.

रिफ्लक्स का निदान

बेरियम निगलने की जांच (ऊपरी GI पथ)

निचला एसोफेजिअल स्फिन्क्टर और पेट

निचला एसोफेजिअल स्फिन्क्टर और पेट

बेरियम निगलने की जांच में, जिसे वीडियो प्रतिदीप्तिदर्शन / ऊपरी पेट और आँतों की जांच भी कहते हैं, बच्चा बेरियम के साथ एक चौक जैसा तरल पीता है, जो एक एक्स-रे पर दिखाई देता है. यह एक्स-रे उन स्थानों को दिखाता है, जिसमें भोजन नली के नष्ट हुए हिस्से के ऊतक ज़ख़्मी हो जाते हैं और भोजन को आगे भेजने के लिए एक संकीर्ण मार्ग बना देते हैं. यह एक्स-रे ऊपरी पाचन तंत्र, घेघा, पेट और ग्रहणी की विकृतियाँ भी दिखा सकता है. वीडियो प्रतिदीप्तिदर्शन बच्चे को बेरियम वाला तरल पीते हुए भी दिखाता है और उस तरल को उल्टा भोजन नली में या फेफड़ों में चढ़ते हुए भी दिखा सकता है. फिर बच्चे को अलग-अलग गाढ़ेपन वाले तरल पिलाकर गाढ़ेपन का एक सुरक्षित स्तर ढूँढा जाता है, जो भोजन के दौरान एस्पिरेशन को कम करने या खत्म करने में सहायक हो सके.

24 घंटे पीएच जांच

यह रिफ्लक्स के लिए एक विश्वसनीय परीक्षण है. एक पतली नली नाक के माध्यम से अन्दर डाली जाती है और उसे भोजन नली में रखा जाता है, जहां पेट और भोजन नली मिलते हैं. अगले 24 घंटे के दौरान यह नली एसिड का स्तर नापती है. अगर एसिड का स्तर लगातार ऊंचा रहता है, तो इसका अर्थ है कि रिफ्लक्स हो रहा है. इसके अलावा, यह परीक्षण यह भी दिखाता है, कि जब बच्चा रोता, खांसता, या रिफ्लक्स के अन्य लक्षण दिखाता है, क्या तब भी उसके शरीर में एसिड का स्तर ऊंचा होता है.

एंडोस्कोपी

एक छोटी, लचीली नली एक कैमरे के साथ एक धागे के सहारे भोजन नली, पेट और ग्रहणी तक उतारी जाती है ताकि डॉक्टर आँतों के अन्दर की जांच कर सकें और रिफ्लक्स से होने वाले नुकसान की पहचान करने में सक्षम हो सकें. भोजन नली, पेट, और ऊपरी छोटी आंत की बायोप्सी भी एंडोस्कोप के माध्यम से की जा सकती है और खाद्य एलर्जी और अन्य विकारों का निदान करने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है. इस प्रक्रिया के दौरान बच्चे को बेहोश करने की ज़रूरत होती है.

पेट खाली होने का अध्ययन (दूध स्कैन)

पेट खाली होने की जांच जैसे दूध स्कैन या गैस्ट्रो ईसोफेजियल सिन्टीग्राफी से इस बात का निर्धारण होता है कि पेट खाली होने में कितना समय लग रहा है. बच्चे को एक रेडियम लेबल पाउडर मिश्रित दूध या अन्य खाद्य या पेय निगलने के लिए दिया जाता है, पाचन तंत्र के माध्यम से जिसका निरीक्षण किया जा सकता है. यह परीक्षण भोजन नली (रिफ्लक्स की जांच के लिए), फेफड़ों (एस्पिरेशन कीजाँच के लिए), और पेट (धीमी गति से खाली पेट की जाँच करने के लिए) पर केंद्रित होता है.

क्योंकि यह परीक्षण पेट में खाद्य या पेय कितने समय तक रहता है, इसकी जांच करता है, अतः यह जठरांत्र गतिशीलता के मुद्दों के लिए एक प्रभावी परीक्षण है. यह परीक्षण पीएच जांच की तुलना में रिफ्लक्स का पता लगाने में और अधिक सटीक हो सकता है, क्योंकि यह सामान्य भोजन से ज्यादा मिलता-जुलता है, और पूरे पाचन तंत्र के माध्यम से पाचन प्रक्रिया की जांच करता है. संरचनात्मक विषमता का पता लगाने में यह एंडोस्कोपी या बेरियम जांच से कम प्रभावी है.

स्तनपान और रिफ्लक्स

स्तनपान शिशुओं में रिफ्लक्स से कुछ राहत प्रदान करता प्रतीत होता है. यह इसलिए हो सकता है क्योंकि स्तनपान करना बच्चे के लिए सुखदायक होता है. इसके अलावा, मां का दूध अधिक आसानी से और फ़ॉर्मूला से जल्दी पच जाता है. विशेष रूप से, गाय के दूध से बने फार्मूले को पचाना मुश्किल हो सकता है और धीमी गति से पेट खाली होने वाले बच्चों के लिए जल्दी पाचन रिफ्लक्स की आवृत्तियों को कम कर सकता है.

इसके अतिरिक्त, मां के दूध में कुछ एंटासिड गुण भी होते है, जो भोजन नली में एसिड को कम करते हैं या कम से कम उनको वापस पेट में भेज देते हैं, जिससे दर्द कम हो जाता है.

रिफ्लक्स का उपचार

जीवन शैली में परिवर्तन

आम तौर पर जीवन के पहले वर्ष के भीतर अधिकांश बच्चे रिफ्लक्स से पार पा लेते हैं. इन बच्चों के लिए, जीवन शैली में परिवर्तन भोजन का सेवन बढ़ाकर रोने और दर्द जैसे लक्षणों को कम करने में प्रभावी हो सकता है:

कुछ खाद्य पदार्थ जैसे – मसालेदार, वसायुक्त या अम्लीय – रिफ्लक्स को बढ़ा सकते हैं, अतः इनसे बचना चाहिए.

बच्चे को अक्सर डकार दिलाने और थोड़ी-थोड़ी देर में थोड़ा-थोड़ा खाना देने से भी मदद मिल सकती है.

बच्चे को केवल चावल के अनाज की बजाय अगर उसके साथ दलिया या खाने को गाढ़ा करने वाला भोजन या फार्मूला – जो पचाने के लिए आसान हो सकता है – दिया जाये, तो खाने के वापस ऊपर आने की सम्भावना बहुत कम हो जाती है.

गुरुत्वाकर्षण भी पेट सामग्री को पेट में रखने में मदद कर सकता है.बच्चे के बिस्तर या पालने के सिर को लकड़ी के फट्टे से या एक कील का उपयोग करके ऊपर उठाकर, या बच्चे को भोजन के बाद सीधा रखते हुए, एक उछलने वाली सीट या शिशु वाहक में बैठाने से खाना नीचे रखने में मदद के लिए गुरुत्वाकर्षण का उपयोग कर सकते हैं.

बच्चे की एलर्जी जाँच कराना भी एक अच्छा विचार हो सकता है, क्योंकि हो सकता है कि वह रिफ्लक्स को अधिक गंभीर बना रही हो.

रिफ्लक्स के लिए चिकित्सा

जब जीवन शैली में परिवर्तन रिफ्लक्स का मुकाबला करने के लिए पर्याप्त न हो, तो बच्चे के डॉक्टर लक्षणों को कम करने में मदद करने के लिए ये दवाएं लिख सकते हैं.

  1. प्रोटॉन पंप प्रावरोधक (PPIs)
    • पेट में अम्ल उत्पादन घटाते हैं, जिससे अम्ल से होने वाले नुकसान से भोजन नली की रक्षा होती है.
    • भोजन से एक घंटे पहले लिया जाना चाहिए, ताकि दवा भोजन के दौरान अपने उच्चतम स्तर पर हो.
    • PPIs के उदाहरण में शामिल हैं – Omeprazole (Prilosec), Lansoprazole (Prevacid), Rabeprazole (Aciphex), Pantoprazole (Protonix), और Esomeprazole (Nexium)
  2. Antacids
    • पेट का पीएच बढ़ाते हैं, एसिड को निष्क्रिय करने के लिए.
    • हालांकि एंटासिड काफी जल्दी असर करते हैं, लेकिन इनके असर की अवधि केवल 30 मिनट या उससे भी कम होती है, अतः इन्हें दिन भर में बार-बार लिया जाना चाहिए – विशेषकर भोजन के तुरंत बाद, और फिर भोजन के दो घंटे के बाद, ताकि पेट खाली होने की गति कम हो सके.
    • कैल्शियम एंटासिड एसिड के पलटाव का कारण हो सकता है.
    • एल्यूमिनियम एंटासिड कब्ज का कारण हो सकता है.
    • मैग्नीशियम एंटासिड दस्त का कारण बन सकता है.
    • एंटासिड के उदाहरण हैं, Gaviscon और Tums.
  3. हिस्टामिन (एच 2 रिसेप्टर) एंटागोनिस्ट
    • हिस्टामिन रिसेप्टर्स, जो एसिड के उत्पादन को प्रोत्साहित करते हैं, को बाधित कर के अम्लों का उत्पादन कम करता है.
    • भोजन के बाद 30 मिनट लिया जाना चाहिए ताकि भोजन पेट के अम्ल द्वारा ठीक से पच सके.
    • ग्रासनलीशोथ (भोजन नली की दर्दनाक सूजन और लालिमा) को कम करता है.
    • तरल रूप में होने के कारण बच्चे इसे आसानी से ले सकते हैं, अतः बच्चों के लिए इसकी ज्यादा सलाह दी जाती है.
    • इसके उदाहरण हैं- Cimetidine (Tagamet), Ranitidine (Zantac), Nizatidine (Axid), और Famotidine (Pepsid).
  4. प्रोकाईनेटिक एजेंट
    • लेस को अधिक मजबूती से बंद करके रिफ्लक्स को कम करता है.
    • प्रोकाईनेटिक एजेंटों की प्रतिकूल प्रतिक्रिया होने की संभावना होती है.
    • इसके उदाहरण हैं- Metoclopramide (Reglan), Cisapride (Propulsid), Erythromycin (Dispartab, Robimycin), और Bethanechal (Duvoid, Urecholine)
  5. गतिशीलता समर्थक दवाएं
    • पाचन तंत्र यानि भोजन नली, पेट, छोटी आंत और कोलन की मांसपेशियों को उद्दीप्त करता है, लेकिन कब्ज का कारण बन सकता है.
    • स्फिंक्टर और भोजन नली पर दवा के प्रभाव छोटे और बहुत प्रभावी नहीं होते हैं.
    • गतिशीलता दवाओं को अक्सर अन्य रिफ्लक्स दवाओं के साथ दिया जाता है.
    • दवा एक बार भोजन से 30 मिनट पहले और सोते समय ली जाती है.
    • उदाहरण के लिए – Urecholine और Regalin.

रिफ्लक्स के लिए सर्जिकल उपचार – निसेन फंडोप्लिकेशन

निसेन फंडोप्लिकेशन

निसेन फंडोप्लिकेशन

यदि किसी बच्चे का रिफ्लक्स ठीक नहीं होता है, और जीवन शैली में परिवर्तन और दवाओं से कोई असर नहीं होता है, खासकर जब बच्चे का वजन बढ़ न रहा हो, तो डॉक्टर शल्य चिकित्सा विकल्प पर विचार कर सकता है.
एक निसेन फंडोप्लिकेशन में, पेट का ऊपरी हिस्सा एक कृत्रिम स्फिंक्टर का निर्माण करते हुए भोजन नली के चारों ओर लपेटा जाता है. पेट की मजबूत मांसपेशियां भोजन नली को दबाते हुए बंद करती हैं, जिससे पेट की सामग्री वापस भोजन नली में ऊपर नहीं आ पाती. यह ऑपरेशन पेट में एक छोटा सा चीरा लगाकर लेप्रोस्कोपी से पूरा किया जा सकता है.

अधिकांश रोगियों में निस्सेन के बाद रिफ्लक्स बहुत कम हो जाता है, लेकिन कुछ जटिलतायें हो सकती हैं. भोजन कृत्रिम स्फिंक्टर में अटक सकता है. भोजन अपने आप नीचे आ सकता है या एंडोस्कोपी के माध्यम से हटाया जा सकता है. अन्य मामलों में, सर्जरी मौखिक घृणा का कारण बन सकती है, जिसका परिणाम होता है वजन में कमी.

मुख्य रिफ्लक्स वेबसाइटों के लिंक