बाल आहार नली

नलियों द्वारा मरीज की आंत में भोजन पहुँचाना

पाचन तंत्र का आरेख

पाचन तंत्र का आरेख

आंत्र-नली आहार एक नली के माध्यम से तरल पोषक तत्वों को सीधे जठरांत्र पथ में पहुँचाना है. बाल चिकित्सा मामलों में, यह एक कार्यरत जठरांत्र (जीआई) पथ वाले बच्चों और शिशुओं, जो मौखिक रूप से पर्याप्त पोषक तत्व निगलने में सक्षम नहीं हैं, के लिए प्रयोग किया जाता है.

भोजन नली की ज़रुरत का संकेत देने वाली परिस्थितियों में इन कारणों को शामिल कर सकते हैं:

  • पोषक तत्वों के अवशोषण, पाचन, उद्ग्रहण, उपयोग, स्राव या संग्रहण सम्बन्धी जठरांत्र विकार, जन्मजात शारीरिक या चयापचय संबंधी विकार, गंभीर एलर्जी, गंभीर रिफ्लक्स, भोजन से इनकार के व्यवहार.
  • मस्तिष्क पक्षाघात, पेशी दुर्विकास, रीढ़ की हड्डी के दोष या केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के लिए नुकसानदेह तंत्रिका-मांसपेशी विकार.
  • हृदय विकार और अति चयापचय की स्थितियां (जैसे जलना, कैंसर के कुछ रूप) .
  • समय-पूर्व प्रसव और / या पनपने में विफलता.

आंत्र-आहार और परा-आंत्र-आहार के बीच अंतर को समझना महत्वपूर्ण है:

  • आंत्र आहार एक अक्षुण्ण, कार्यरत जठरांत्र प्रणाली में सामान्य मौखिक अंतर्ग्रहण की समस्याओं को दरकिनार करते हुए एक नली के माध्यम से पाचक पोषक फ़ॉर्मूला पहुंचाता है.
  • परा-आंत्र आहार, जिसे कुल आंत्रेतर पोषण(टीपीएन) भी कहा जाता है, अंतर्ग्रहण और पाचन दोनों को दरकिनार करते हुए एक और अधिक मौलिक फ़ॉर्मूला नसों से सीधे संचार प्रणाली में पहुंचाता है, जब जठरांत्र सिस्टम खराब रहता है या उसमें कोई अन्य समस्या होती है.

आंत्र भोजन नली के प्रकारों को, बिंदु जिसमें से नली शरीर में प्रवेश करती है और बिंदु जहाँ के लिए पोषक तत्व फ़ॉर्मूला दिया जाता है, के अनुसार इस प्रकार वर्गीकृत किया जाता है:

  • नैसोगैस्ट्रिक -नली (एनजी) नाक से पेट के लिए.
  • नैसोडुओडोनल नली नाक से ग्रहणी के लिए.(पेट के तुरंत नीचे छोटी आंत के पहले या ऊपरी हिस्से).
  • नैसोजेजुनल नली नाक से ग्रहणी को (छोटी आंत के अगले या मध्य भाग और लघ्वान्त्र से पहले).
  • गैस्ट्रोस्टोमी नली (जीटी) त्वचा में एक शल्य-क्रिया द्वारा किये गए सुराख़ से पेट की दीवार के माध्यम से सीधे पेट में.
  • जेजुनोस्टोमी नली त्वचा में एक शल्य-क्रिया द्वारा किये गए सुराख़ से पेट की दीवार के माध्यम से सीधे ग्रहणी में.

भोजन नली का उपयोग करने के लिए एक चिकित्सक की पसंद शारीरिक, पाचन और आहार व्यवहार कारकों तथा साथ ही भोजन नली के संभावित इस्तेमाल की अवधि पर निर्भर करती है. नैसोगैस्ट्रिक और जी नली का सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है.

एनजी भोजन नली (NG-नली)

पाचन तंत्र का आरेख

पाचन तंत्र का आरेख

नैसोगैस्ट्रिक-नली लगाना एक चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें सर्जरी की आवश्यकता नहीं है, जिसके द्वारा एक लचीली नली को नाक के माध्यम से गले और भोजन नली से होते हुए पेट में डाल दिया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य आहार, दवाओं या अन्य चिकित्सकीय मौखिक एजेंटों को शरीर में पहुंचाना है.

नैसोगैस्ट्रिक-नली लगाना चेहरे पर आघात, खोपड़ी में फ्रैक्चर, एसोफेजिअल असामान्यताओं या कुछ खास विकृतियों, समस्याग्रस्त मानसिक स्थिति या बिगड़े हवापथ के रोगियों के लिए उचित नहीं है.

आमतौर पर, छोटी-मोटी जटिलताओं में गले में खराश, साइनसाइटिस या नकसीर को शामिल कर सकते हैं. कभी-कभार, अधिक महत्वपूर्ण जटिलताओं के मामले में तत्काल चिकित्सा या नाक से डाली गई नली की शल्य चिकित्सा के विकल्प पर विचार करने की आवश्यकता हो सकती है.

कभी कभी, जठर पक्षाघात या अन्य बीमारियों वाले रोगियों में अल्पकालिक आंत्र आहार का लक्ष्य जठरनिर्गम के पीछे आंत्र घोल देने के लिए किया जाना चाहिए. एंडोस्कोपिक तरीके से छोटी आंत में नली के सटीक स्थान तक पहुंचा जा सकता है, चाहे वह ग्रहणी हो या मध्यांत्र. जटिलताओं में एंडोस्कोप की वापसी के दौरान आहार नली का पेट में वापस पहुँच जाना या आहार के दौरान अनजाना स्थानांतरण हो सकता है, लेकिन इसे ठीक किया जा सकता है. नैसोगैस्ट्रिक-नली के विपरीत, ये प्रक्रियायें एक प्रशिक्षित माता-पिता या देखभाल करने वाले के लिए उपयुक्त नहीं हैं.

गैस्ट्रिक आहार नली (G-नली)

आहार नली आहार नली

पेट में आहार नली की प्रविष्टि के लिए सबसे आम शल्य प्रक्रिया पर्क्युटैनियस एंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टोमी (PEG) है. एक एंडोस्कोप मुंह और भोजन नली के माध्यम से बेहोश मरीज के पेट में डाला जाता है. यह एंडोस्कोप शरीर के बाहर से देखने पर एक शक्तिशाली प्रकाश स्रोत के रूप में पेट में अपनी स्थिति को प्रकट करता है. एक नरम गाइड तार या सीवन एक छोटे से चीरे के माध्यम से डाला जाता है, जिसे एंडोस्कोप से पकड़कर और भोजन नली के माध्यम से ऊपर खींच लिया जाता है. फिर पीईजी नली को, एक गुब्बारा टिप या प्रतिधारण गुंबद से जुड़ा उसका अंतिम छोर पेट में ही छोड़ते हुए, पेट में वापस नीचे धकेलकर उस चीरे के माध्यम से बाहर निकाला जा सकता है.

सर्जरी सरल है और इसमें थोड़ा बहुत जोखिम या बेचैनी हो सकती है और इसमें केवल 20 मिनट लगते हैं. आहार की इस तरह से रखी गई नलियां दर्दनाक नहीं होतीं और जब ये उपयोग में नहीं होतीं, तो इन्हें कपड़ों के नीचे चारों ओर घूमने से रोकने के लिए त्वचा के साथ टेप से चिपकाया जा सकता है.

गैस्ट्रिक नलियां, लंबी अवधि के उपयोग के लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं और छह महीने तक चल जाती हैं. इन्हें बिना किसी अतिरिक्त सर्जरी के आराम से बदला भी जा सकता है.

जिन रोगियों में जठर में भोजन पहुँचाने में कोई समस्या होती है, उनके लिए नली ग्रहणी या मध्यांत्र में डाली जाती है, जिसके लिए जेज्युनोस्टोमी या डुएडेनोस्टोमी का प्रयोग किया जाता है.

हर प्रकार की आहार नली के लिए चिकित्सक को पीईजी का चयन करते समय रोगी-विशेष संबंधी सभी कारकों पर विचार कर लेना चाहिए. इससे हो सकने वाली जटिलताओं में मौजूदा पेरिटोनिटिस या पेट की दीवार के संक्रमण, एस्पिरेशन के उच्च जोखिम या जीआई शरीर रचना में असामान्यताएँ (जैसे मालरोटेशन) शामिल हैं.

पर्क्युटैनियस नली से जो जटिलतायें हो सकती हैं, उनमें सेल्युलाईटिस (चीरा बिंदु के आसपास संक्रमण),peg procedure पेरिटोनिटिस (उदर गुहा के भीतर संक्रमण), जठर का अलग हो जाना और नली का जीआई पथ के भीतर या वापस उदर गुहा में प्रवास शामिल हैं.

 

भोजन नली प्रशासन

नली

शिशुओं और बच्चों को नली द्वारा दिया जाने वाला आहार एक सतत गुरुत्वाकर्षण ड्रिप, विनियमित आसव पम्प, नियमित दिया जाने वाला बोलस या कुछ अन्य प्रकार के मिश्रण हो सकते हैं. जब मौखिक आहार भी देना संभव हो, तो बच्चे और परिवार की दिनचर्या में फिट बैठता सामान्य और नली आहार का एक नियमित कार्यक्रम, सबसे अच्छा संयोजन है.

समय-समय पर बोलस देने के लिए, हर रोज़ आंत्र फ़ॉर्मूला एक नियमित समय पर दिया जाता है और प्रत्येक भोजन करीब आधे घंटे तक चलता है. बोलस जीआई पथ के माध्यम से चलती पोषक तत्व सामग्री की असतत मात्रा को दर्शाता है. बोलस आहार के लाभ हैं, खर्च में कमी, सुविधा, आहारों के बीच कुछ भी कर पाने की स्वतंत्रता और एक सामान्य भोजन कार्यक्रम से समानता. इसके नुकसान हैं, निरंतर ड्रिप आहार की तुलना में एस्पिरेशन की संभावना में वृद्धि, और कुछ मामलों में दस्त, सूजन, और ऐंठन, जब आहार की दी जाने वाली मात्रा बहुत बड़ी हो.

निरंतर ड्रिप आहार के लिए आंत्र फ़ॉर्मूले के कंटेनर को रोगी के पेट की तुलना में अधिक ऊपर रख कर दिया सीधे गुरुत्वाकर्षण व्यवस्था का प्रयोग किया जाता है. हालाँकि आंत्र फ़ॉर्मूला चौबीसों घंटे दिया जा सकता है, लेकिन आमतौर पर इसकी सलाह नहीं दी जाती, क्योंकि यह न केवल बच्चे के हिलने-डुलने की स्वतंत्रता को सीमित करता है, बल्कि हाइपोग्लाइसीमिया को भी जन्म दे सकता है. आमतौर पर, एक सतत ड्रिप रात के दौरान कई घंटे के लिए प्रशासित किया जाता है ताकि दिन के दौरान छोटे बोलस या मौखिक आहार प्रशासित किये जा सकें. गुरुत्वाकर्षण ड्रिप की दर में परिवर्तन हो सकने के कारण उसकी अक्सर निगरानी की जानी चाहिए.

विनियमित पंप आहार के लिए, एक इलेक्ट्रॉनिक पंप बिना किसी रुकावट के सेवन की मात्रा की जाँच और उसे मापने के लिए प्रयोग किया जाता है और एक गुरुत्वाकर्षण ड्रिप के साथ, दिन की गतिविधियों में हस्तक्षेप को कम करने के लिए, रात के दौरान प्रशासित किया जा सकता है. यह सबसे महंगा विकल्प है.

आंत्र फॉर्मूला

आंत्र फ़ॉर्मूले का चयन रोगी के हिसाब से किया जाता है और व्यावसायिक तौर पर तैयार फार्मूलों की एक पूरी श्रृंखला बाज़ार में उपलब्ध है. घर पर इसे तैयार करना भी एक विकल्प हो सकता है. एक डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ के मार्गदर्शन के अनुसार ही आंत्र फ़ॉर्मूला का चयन किया जाना चाहिए. एक उचित फ़ॉर्मूला निर्धारित करने में जीआई पथ की हालत और क्षमता, किसी भी अंतर्निहित रोग, एलर्जी या भोजन असहिष्णुता और उम्र पर अवश्य विचार किया जाना चाहिए. इसी तरह, नली के प्रकार और उसके लगाने के तरीके को चिपचिपाहट, शक्तिप्रदता और मात्रा और प्रशासन की आवृत्ति के लिए ध्यान में रखना चाहिए.

परासारणीयता और शक्तिप्रदता

परासारणीयता रासायनिक यौगिकों (अमीनो एसिड, कार्बोहाइड्रेट, इलेक्ट्रोलाइट्स) में मौजूद (वजन के द्वारा) सांद्रता का मापक है, जो फ़ॉर्मूला के ऑस्माटिक व्यवहार को प्रभावित करता है. शक्तिप्रदता मानक शरीर के सामान्य तरल पदार्थ के सापेक्ष ऑस्मौटिक व्यवहार का मापक है. एक सामान्य शरीर के तरल पदार्थ से उच्च प्रभावी परासरणीयता (Hypertonicity) वाला फ़ॉर्मूला सांद्रता को कम करने के लिए जीआई पथ में पानी को आकर्षित करेगा. जीआई पथ में बहुत ज्यादा पानी मतली, ऐंठन, सूजन और दस्त का कारण बन सकता है. यदि प्रभावी परासरणीयता बहुत कम है (Hypotonicity), तो प्रभावित कोशिकायें फूल या फट भी सकती हैं और गंभीर सूजन या अन्य जटिलतायें पैदा कर सकती हैं. आइसोटोनीसिटी की हालात को प्राथमिकता दी जाती है, जिसमें आंत्र फ़ॉर्मूला और जीआई पथ की कोशिकायें ऑस्मौटिक संतुलन में होती हैं, जब तक उन पर सामान्य पाचन प्रक्रिया द्वारा काम न किया जाए.

आंत्र फार्मूले निम्नलिखित प्रकार के हो सकते हैं:

  • मानक फार्मूले पूरा पोषण प्रदान करते हैं और एक नियमित जीआई पथ वाले, पर्याप्त पोषक तत्वों और कैलोरी को मुंह से न ले सकने वाले मरीजों के लिए आदर्श होते हैं. ये आम तौर पर आईसोटॉनिक, सुविधाजनक और रोगाणुमुक्त होते हैं.
  • घर पर तैयार फार्मूले अधिक समय लेने वाले लेकिन मानक वाणिज्यिक फार्मूले की तुलना में कम महंगे होते हैं. एक डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ द्वारा निर्देशित एक पूरे आहार फ़ॉर्मूले को बनाने के लिए अक्सर शिशु फार्मूले या दूध को आधार के रूप में इस्तेमाल करके तैयार किया जाता है. इन फार्मूलों को एक गैस्ट्रिक नली (जी-नली) के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से दिया जा सकता है, क्योंकि नैसोगैस्ट्रिक-नली (एनजी नली) संकरी होने के कारण यह गाढ़ा फ़ॉर्मूला उसमें से ठीक से गुज़र नहीं पाता.
  • तात्विक फार्मूले में पूर्वपाचित पोषक तत्व और आवश्यक विटामिन और खनिज होते हैं. इनका लाभ यह है, कि इनके लिए बहुत कम पाचन की आवश्यकता होती है और मल का उत्सर्जन भी कम से कम होता है. इनके नुकसान यह हैं उच्च सांद्रता होने के कारण इनका तेजी से संचार ऑस्मौटिक दस्त का कारण बन सकता है. ये अधिक महंगे भी होते हैं.
  • मॉड्यूलर फार्मूले विशेष पोषण जरूरतों को पूरा करने के लिए वाणिज्यिक या घर पर तैयार फार्मूले में विशिष्ट पोषक तत्वों को जोड़कर बनाये जाते हैं.
  • विशिष्ट फार्मूले एक डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ द्वारा विशेष मामलों के लिए तैयार किये जाते हैं, जो आमतौर पर असमय जन्म या जन्मजात चयापचय की त्रुटियों वाले बच्चों के लिए होते हैं.

आंत्र फ़ॉर्मूले की पूरी पोषक तत्व संरचना में ये सब शामिल हैं:

  • कार्बोहाइड्रेट स्रोतों को पानी में घुलनशील और आसानी से पचने वाला या जीआई पथ में सोखा जा सकने वाला होना चाहिए. आम कार्बोहाइड्रेट स्रोतों में कॉर्न सिरप वाले ठोस, हाइड्रोलाईज़ किया गया मक्की का आटा, माल्टोडेक्सट्रिन (स्टार्च व्युत्पन्न पोलीसैकराइड), और ग्लूकोज (मोनोसैकराइड या एक सरल शर्करा) के अन्य रूप शामिल हैं.
  • लिपिड एक उच्च कैलोरी ऊर्जा स्रोत हैं. आम तौर पर मकई या सोयाबीन तेल का प्रयोग किया जाता है. लिपिड द्वारा प्रदान की गई वसा सामग्री का समायोजन इस प्रकार होता है कि, ग्लूकोज असहिष्णुता उच्च वसा सामग्री को खींचती है जबकि आंत्र अपशोषण निम्न वसा सामग्री को.
  • प्रोटीन पूरी तरह बिना टूटे या आंशिक रूप से पूर्वपाचित या मुक्त अमीनो एसिड के रूप में दिए जा सकते हैं. इसके आम सूत्र कैसीनेट या सोया प्रोटीन (डेयरी प्रोटीन का एक रूप) हैं. पोलीमेरिक फार्मूले बिना टूटे प्रोटीन का उपयोग करते हैं. ओलिगोमेरिक फार्मूलों में एंजाइम के रूप में हाइड्रोलाइज़ (पूर्वपाचित) किए हुए प्रोटीन होते हैं. मोनोमेरिक फार्मूलों में मुक्त अमीनो एसिड होते हैं.
  • जल, आंत्र फ़ॉर्मूले का विलेय और हाइड्रेशन के लिए आवश्यक होने के कारण फ़ॉर्मूले की कैलोरी का घनत्व निर्धारित करता है. कम कैलोरी घनत्व करीब 85% पानी होता है; उच्च कैलोरी घनत्व 70% पानी होता है.
  • सूक्ष्म पोषक, पर्याप्त मात्रा में विटामिन और खनिज के लिए आरडीए का 100% पूरा पोषण (अनुशंसित दैनिक मात्रा) सुनिश्चित करता है. आवश्यक मात्रा उत्पादों और मरीजों और उनके वजन तथा उम्र के हिसाब से भिन्न-भिन्न होती है. कुछ रोग-विशिष्ट फार्मूले पूरा पोषण नहीं देते हैं.
  • फाइबर, आमतौर पर अघुलनशील सोया पोलीसैकराइड, को मल के गाढ़ेपन को नियंत्रित करने के लिए जोड़ा जाता है. घुलनशील फाइबरों में जई फाइबर, ग्वार गम और पेक्टिन भी शामिल हैं. फाइबर प्रतिबंधित तरल पदार्थ या जीआई गतिशीलता में देरी वाले रोगियों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है.

कुछ व्यापक रूप से उपलब्ध व्यावसायिक तौर पर तैयार बाल चिकित्सा आंत फार्मूले हैं: कम्प्लीट बाल चिकित्सा, नियोश्योर, न्यूट्रेन जूनियर, पीडियाश्योर, पेप्टामेन जूनियर, बाल चिकित्सा पेप्टिनेक्स और रिसोर्स-बच्चों के लिए. ये सभी ब्रांड लेबल अतिरिक्त फाइबर सहित तैयार फ़ॉर्मूला की एक पूरी श्रृंखला उपलब्ध कराते हैं.

आहार नली निर्भरता

कभी कभी, एक आहार नली लगाना अपरिहार्य हो जाता है. हालांकि, यह हाइड्रेशन और पोषण का कार्य करता भली-भाँति कर देती है, लेकिन असली खाना खाने के सभी लाभ इससे प्राप्त नहीं हो सकते. उदाहरण के लिए, कल्पना कीजिए, कि आप पूरे दिन गेटोरेड या एनश्योर पी रहे हैं. आप कैसा महसूस करेंगे? क्या आपकी बुद्धि का सही विकास हो पायेगा? क्या आप ऊर्जावान महसूस करेंगे? क्या आपकी त्वचा स्वस्थ व चमकदार होगी?

आहार नली के साथ एक अन्य परेशानी यह है कि बच्चे मुँह से खाने से मिलने वाली तृप्ति की भावना को नहीं समझ पाते क्योंकि भोजन नली इस प्रणाली को नजरअंदाज करती है. अगर पहले बच्चा खाने का कुछ मतलब समझता भी था, तो आहार नली लगाने के बाद तो निश्चित रूप से वह इसके बारे में कुछ भी नहीं समझेगा.

आहार नली लगाने के परिणामस्वरूप मौखिक सेवन में हमेशा भारी मात्रा में कमी हो जाती है. उससे भी बदतर, कभी कभी मुँह से खाना पूरी तरह से बंद हो जाता है.

लेकिन, कभी कभी आहार नली लगाना आवश्यक होता है. शल्य-क्रिया या एस्पिरेशन की वजह से मुँह से खाना बच्चे के लिए असुरक्षित हो सकता है. लेकिन अगर बच्चा मौखिक रूप से खाने के लिए सुरक्षित है, तो एक आहार नली बिलकुल अनावश्यक और अत्यधिक अनैतिक है क्योंकि ऐसी स्थिति में आहार थेरेपी कारगर हो सकती है.

नैसोगैस्ट्रिक (एनजी) ट्यूब मीमांसा

एनजी नली नथुने में और घेघा के माध्यम से डाली जाती है.

उल्टी में वृद्धि करने के अलावा, एनजी नलियां कुछ भी निगलते वक़्त बड़ी तकलीफ पैदा करती हैं. इस तकलीफ के कारण नली निकाल दिये जाने के बाद भी बच्चे के मन में निगलने के प्रति एक डर बना रहता है. एनजी नली नाक गुहा को आघात पहुँचाने का कारण भी बन सकती है. आम तौर पर इस प्रकार की आहार नलियों की अस्थायी उपयोग के लिए ही सिफारिश की जाती है.

कई बच्चे जिन्हें यह नली लगाई जाती है, उन्हें बाद में गैस्ट्रोस्टोमी नली (जी नली) लगानी पड़ती है, क्योंकि निगलने से डरने के कारण वे पर्याप्त मात्रा में आहार नहीं ले पाते.

आहार नली के अन्य मुद्दे

पाचन प्रक्रिया का पहला भाग तब होता है, जब मुंह में लार भोजन का विभाजन कर देती है और वह घेघा से नीचे यात्रा करता है. जब फ़ॉर्मूला को सीधे पेट में डाला जाता है, तो यह कदम छूट जाता है.

आहार नली लगाने के बाद प्रति दिन की उल्टी की संख्या में भी आमतौर पर वृद्धि हो जाती है. बाल रोग विशेषज्ञ इसके लिए दवाएं देते हैं, लेकिन अधिकतर दवाओं से कोई खास परिणाम नहीं मिलते.

ऐसे बार-बार उलटी करने वाले बच्चे के माता पिता के लिए घर से कुछ देर के लिये भी बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि इसके साथ-साथ उन्हें बच्चे को पूरे दिन में कई बार नली से आहार भी देना होता है.

मुख्य जी-नली और एनजी-नली आहार साइटों के लिंक

चयनित उद्धरण

  1. “Enteral Formula Selection: A Review of Selected Product Categories” Practical Gastroenterology: Nutrition Issues in Gastroenterology, Series #28, June 2005.
  2. “Pediatric Enteral Nutrition” JPEN: Journal of Parenteral and Enteral Nutrition, Jan/Feb 2006, Axelrod et. al.
  3. Baker, Baker, and Davis (1994). Pediatric Enteral Nutrition. Jones & Bartlett Publishers.
  4. Multiple sources for “pediatric tube feeding” and “pediatric enteral feeding” at pubmed.gov.